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Fri Mar 19th, 2021

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#ayodhyadhaamdarshan #Ayodhya #ayodhyadhaam *प्रेस विज्ञप्ति* *(अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा 2021)**समाज जागरण के लिए सामाजिक-धार्मिक संगठनों को साथ जोड़ेगा संघ–अरुण कुमार*बेंगलुरु। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार ने कहा कि समाज में कार्यरत सामाजिक, धार्मिक संगठनों को साथ लेकर समाज व्यापी, राष्ट्र व्यापी सामाजिक शक्ति खड़ी करना ही संघ का लक्ष्य है. संघ समाज की सामूहिक शक्ति के जागरण का कार्य कर रहा है. देश समाज के लिए कार्य करने वाले समान विचार के समस्त लोगों, संगठनों को साथ जोड़ना इस दिशा में भी संघ प्रयास कर रहा है। वे बेंगलुरु में 19, 20 मार्च को होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (जनसेवा विद्या केंद्र, बेंगलुरु) के संबंध में जानकारी देने के लिए आयोजित प्रेस वार्ता में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।*पूरी विज्ञप्ति पढ़ने के लिये क्लिक करें-*www.facebook.com/108895243856081/posts/469301857815416/ ... See MoreSee Less
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Tue Mar 16th, 2021

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Mon Mar 1st, 2021

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#Ayodhya #ayodhyadhaam #ayodhyadhaamdarshanyoutu.be/QbE_zIKIeZc ... See MoreSee Less
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Thu Jan 7th, 2021

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Wed Dec 30th, 2020

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Mon Dec 28th, 2020

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#ayodhyadhaamdarshan #ayodhyadhaam #Ayodhya Ram Mandir को लेकर ऐसी खबर भी आएगी किसी ने सोचा भी नहीं था! | Ayodhya ... See MoreSee Less
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Sat Dec 19th, 2020

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#ayodhyadhaamdarshan #ayodhyadhaam #Ayodhya www.facebook.com/1226694350694509/posts/3804765996220652/Try RamJanm bhumi frame to your profile pic ... See MoreSee Less
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Wed Dec 16th, 2020

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#ayodhyadhaamdarshan #ayodhyadhaam #Ayodhya 14 वर्ष के वनवास में श्रीराम प्रमुख रूप से 17 जगह रुके, देखिए यात्रा का नक्शाप्रभु श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास हुआ। इस वनवास काल में श्रीराम ने कई ऋषि-मुनियों से शिक्षा और विद्या ग्रहण की, तपस्या की और भारत के आदिवासी, वनवासी और तमाम तरह के भारतीय समाज को संगठित कर उन्हें धर्म के मार्ग पर चलाया। संपूर्ण भारत को उन्होंने एक ही विचारधारा के सूत्र में बांधा, लेकिन इस दौरान उनके साथ कुछ ऐसा भी घटा जिसने उनके जीवन को बदल कर रख दिया। रामायण में उल्लेखित और अनेक अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार जब भगवान राम को वनवास हुआ तब उन्होंने अपनी यात्रा अयोध्या से प्रारंभ करते हुए रामेश्वरम और उसके बाद श्रीलंका में समाप्त की। इस दौरान उनके साथ जहां भी जो घटा उनमें से 200 से अधिक घटना स्थलों की पहचान की गई है। जाने-माने इतिहासकार और पुरातत्वशास्त्री अनुसंधानकर्ता डॉ. राम अवतार ने श्रीराम और सीता के जीवन की घटनाओं से जुड़े ऐसे 200 से भी अधिक स्थानों का पता लगाया है, जहां आज भी तत्संबंधी स्मारक स्थल विद्यमान हैं, जहां श्रीराम और सीता रुके या रहे थे। वहां के स्मारकों, भित्तिचित्रों, गुफाओं आदि स्थानों के समय-काल की जांच-पड़ताल वैज्ञानिक तरीकों से की। आओ जानते हैं कुछ प्रमुख स्थानों के नाम..1.तमसा नदी : अयोध्या से 20 किमी दूर है तमसा नदी। यहां पर उन्होंने नाव से नदी पार की।2.श्रृंगवेरपुर तीर्थ : प्रयागराज से 20-22 किलोमीटर दूर वे श्रृंगवेरपुर पहुंचे, जो निषादराज गुह का राज्य था। यहीं पर गंगा के तट पर उन्होंने केवट से गंगा पार करने को कहा था। श्रृंगवेरपुर को वर्तमान में सिंगरौर कहा जाता है।3.कुरई गांव : सिंगरौर में गंगा पार कर श्रीराम कुरई में रुके थे। 4.प्रयाग : कुरई से आगे चलकर श्रीराम अपने भाई लक्ष्मण और पत्नी सहित प्रयाग पहुंचे थे। प्रयाग को वर्तमान में इलाहाबाद कहा जाता है। 5.चित्रकूणट : प्रभु श्रीराम ने प्रयाग संगम के समीप यमुना नदी को पार किया और फिर पहुंच गए चित्रकूट। चित्रकूट वह स्थान है, जहां राम को मनाने के लिए भरत अपनी सेना के साथ पहुंचते हैं। तब जब दशरथ का देहांत हो जाता है। भारत यहां से राम की चरण पादुका ले जाकर उनकी चरण पादुका रखकर राज्य करते हैं। 6.सतना : चित्रकूट के पास ही सतना (मध्यप्रदेश) स्थित अत्रि ऋषि का आश्रम था। हालांकि अनुसूइया पति महर्षि अत्रि चित्रकूट के तपोवन में रहा करते थे, लेकिन सतना में 'रामवन' नामक स्थान पर भी श्रीराम रुके थे, जहां ऋषि अत्रि का एक ओर आश्रम था। 7.दंडकारण्य: चित्रकूट से निकलकर श्रीराम घने वन में पहुंच गए। असल में यहीं था उनका वनवास। इस वन को उस काल में दंडकारण्य कहा जाता था। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों को मिलाकर दंडकाराण्य था। दंडकारण्य में छत्तीसगढ़, ओडिशा एवं आंध्रप्रदेश राज्यों के अधिकतर हिस्से शामिल हैं। दरअसल, उड़ीसा की महानदी के इस पास से गोदावरी तक दंडकारण्य का क्षेत्र फैला हुआ था। इसी दंडकारण्य का ही हिस्सा है आंध्रप्रदेश का एक शहर भद्राचलम। गोदावरी नदी के तट पर बसा यह शहर सीता-रामचंद्र मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर भद्रगिरि पर्वत पर है। कहा जाता है कि श्रीराम ने अपने वनवास के दौरान कुछ दिन इस भद्रगिरि पर्वत पर ही बिताए थे। स्थानीय मान्यता के मुताबिक दंडकारण्य के आकाश में ही रावण और जटायु का युद्ध हुआ था और जटायु के कुछ अंग दंडकारण्य में आ गिरे थे। ऐसा माना जाता है कि दुनियाभर में सिर्फ यहीं पर जटायु का एकमात्र मंदिर है। 8.पंचवटी नासिक : दण्डकारण्य में मुनियों के आश्रमों में रहने के बाद श्रीराम अगस्त्य मुनि के आश्रम गए। यह आश्रम नासिक के पंचवटी क्षे‍त्र में है जो गोदावरी नदी के किनारे बसा है। यहीं पर लक्ष्मण ने शूर्पणखा की नाक काटी थी। राम-लक्ष्मण ने खर व दूषण के साथ युद्ध किया था। गिद्धराज जटायु से श्रीराम की मैत्री भी यहीं हुई थी। वाल्मीकि रामायण, अरण्यकांड में पंचवटी का मनोहर वर्णन मिलता है। 9.सर्वतीर्थ : नासिक क्षेत्र में शूर्पणखा, मारीच और खर व दूषण के वध के बाद ही रावण ने सीता का हरण किया और जटायु का भी वध किया था जिसकी स्मृति नासिक से 56 किमी दूर ताकेड गांव में 'सर्वतीर्थ' नामक स्थान पर आज भी संरक्षित है। जटायु की मृत्यु सर्वतीर्थ नाम के स्थान पर हुई, जो नासिक जिले के इगतपुरी तहसील के ताकेड गांव में मौजूद है। इस स्थान को सर्वतीर्थ इसलिए कहा गया, क्योंकि यहीं पर मरणासन्न जटायु ने सीता माता के बारे में बताया। रामजी ने यहां जटायु का अंतिम संस्कार करके पिता और जटायु का श्राद्ध-तर्पण किया था। इसी तीर्थ पर लक्ष्मण रेखा थी। 10.पर्णशाला: पर्णशाला आंध्रप्रदेश में खम्माम जिले के भद्राचलम में स्थित है। रामालय से लगभग 1 घंटे की दूरी पर स्थित पर्णशाला को 'पनशाला' या 'पनसाला' भी कहते हैं। पर्णशाला गोदावरी नदी के तट पर स्थित है। मान्यता है कि यही वह स्थान है, जहां से सीताजी का हरण हुआ था। हालांकि कुछ मानते हैं कि इस स्थान पर रावण ने अपना विमान उतारा था। इस स्थल से ही रावण ने सीता को पुष्पक विमान में बिठाया था यानी सीताजी ने धरती यहां छोड़ी थी। इसी से वास्तविक हरण का स्थल यह माना जाता है। यहां पर राम-सीता का प्राचीन मंदिर है। 11.तुंगभद्रा : सर्वतीर्थ और पर्णशाला के बाद श्रीराम-लक्ष्मण सीता की खोज में तुंगभद्रा तथा कावेरी नदियों के क्षेत्र में पहुंच गए। तुंगभद्रा एवं कावेरी नदी क्षेत्रों के अनेक स्थलों पर वे सीता की खोज में गए। 12.शबरी का आश्रम : तुंगभद्रा और कावेरी नदी को पार करते हुए राम और लक्ष्‍मण चले सीता की खोज में। जटायु और कबंध से मिलने के पश्‍चात वे ऋष्यमूक पर्वत पहुंचे। रास्ते में वे पम्पा नदी के पास शबरी आश्रम भी गए, जो आजकल केरल में स्थित है। शबरी जाति से भीलनी थीं और उनका नाम था श्रमणा। 'पम्पा' तुंगभद्रा नदी का पुराना नाम है। इसी नदी के किनारे पर हम्पी बसा हुआ है। पौराणिक ग्रंथ 'रामायण' में हम्पी का उल्लेख वानर राज्य किष्किंधा की राजधानी के तौर पर किया गया है। केरल का प्रसिद्ध 'सबरिमलय मंदिर' तीर्थ इसी नदी के तट पर स्थित है।13.ऋष्यमूक पर्वत : मलय पर्वत और चंदन वनों को पार करते हुए वे ऋष्यमूक पर्वत की ओर बढ़े। यहां उन्होंने हनुमान और सुग्रीव से भेंट की, सीता के आभूषणों को देखा और श्रीराम ने बाली का वध किया। ऋष्यमूक पर्वत वाल्मीकि रामायण में वर्णित वानरों की राजधानी किष्किंधा के निकट स्थित था। ऋष्यमूक पर्वत तथा किष्किंधा नगर कर्नाटक के हम्पी, जिला बेल्लारी में स्थित है। पास की पहाड़ी को 'मतंग पर्वत' माना जाता है। इसी पर्वत पर मतंग ऋषि का आश्रम था जो हनुमानजी के गुरु थे।14.कोडीकरई : हनुमान और सुग्रीव से मिलने के बाद श्रीराम ने वानर सेना का गठन किया और लंका की ओर चल पड़े। तमिलनाडु की एक लंबी तटरेखा है, जो लगभग 1,000 किमी तक विस्‍तारित है। कोडीकरई समुद्र तट वेलांकनी के दक्षिण में स्थित है, जो पूर्व में बंगाल की खाड़ी और दक्षिण में पाल्‍क स्‍ट्रेट से घिरा हुआ है। यहां श्रीराम की सेना ने पड़ाव डाला और श्रीराम ने अपनी सेना को कोडीकरई में एकत्रित कर विचार विमर्ष किया। लेकिन राम की सेना ने उस स्थान के सर्वेक्षण के बाद जाना कि यहां से समुद्र को पार नहीं किया जा सकता और यह स्थान पुल बनाने के लिए उचित भी नहीं है, तब श्रीराम की सेना ने रामेश्वरम की ओर कूच किया। 15..रामेश्‍वरम : रामेश्‍वरम समुद्र तट एक शांत समुद्र तट है और यहां का छिछला पानी तैरने और सन बेदिंग के लिए आदर्श है। रामेश्‍वरम प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थ केंद्र है। महाकाव्‍य रामायण के अनुसार भगवान श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई करने के पहले यहां भगवान शिव की पूजा की थी। रामेश्वरम का शिवलिंग श्रीराम द्वारा स्थापित शिवलिंग है। 16.धनुषकोडी : वाल्मीकि के अनुसार तीन दिन की खोजबीन के बाद श्रीराम ने रामेश्वरम के आगे समुद्र में वह स्थान ढूंढ़ निकाला, जहां से आसानी से श्रीलंका पहुंचा जा सकता हो। उन्होंने नल और नील की मदद से उक्त स्थान से लंका तक का पुनर्निर्माण करने का फैसला लिया। धनुषकोडी भारत के तमिलनाडु राज्‍य के पूर्वी तट पर रामेश्वरम द्वीप के दक्षिणी किनारे पर स्थित एक गांव है। धनुषकोडी पंबन के दक्षिण-पूर्व में स्थित है। धनुषकोडी श्रीलंका में तलैमन्‍नार से करीब 18 मील पश्‍चिम में है। इसका नाम धनुषकोडी इसलिए है कि यहां से श्रीलंका तक वानर सेना के माध्यम से नल और नील ने जो पुल (रामसेतु) बनाया था उसका आकार मार्ग धनुष के समान ही है। इन पूरे इलाकों को मन्नार समुद्री क्षेत्र के अंतर्गत माना जाता है। धनुषकोडी ही भारत और श्रीलंका के बीच एकमात्र स्‍थलीय सीमा है, जहां समुद्र नदी की गहराई जितना है जिसमें कहीं-कहीं भूमि नजर आती है।17.'नुवारा एलिया' पर्वत श्रृंखला : वाल्मीकिय-रामायण अनुसार श्रीलंका के मध्य में रावण का महल था। 'नुवारा एलिया' पहाड़ियों से लगभग 90 किलोमीटर दूर बांद्रवेला की तरफ मध्य लंका की ऊंची पहाड़ियों के बीचोबीच सुरंगों तथा गुफाओं के भंवरजाल मिलते हैं। यहां ऐसे कई पुरातात्विक अवशेष मिलते हैं जिनकी कार्बन डेटिंग से इनका काल निकाला गया है। श्रीलंका में नुआरा एलिया पहाड़ियों के आसपास स्थित रावण फॉल, रावण गुफाएं, अशोक वाटिका, खंडहर हो चुके विभीषण के महल आदि की पुरातात्विक जांच से इनके रामायण काल के होने की पुष्टि होती है। आजकल भी इन स्थानों की भौगोलिक विशेषताएं, जीव, वनस्पति तथा स्मारक आदि बिलकुल वैसे ही हैं जैसे कि रामायण में वर्णित किए गए हैं। श्रीवाल्मीकि ने रामायण की संरचना श्रीराम के राज्याभिषेक के बाद वर्ष 5075 ईपू के आसपास की होगी (1/4/1 -2)। श्रुति स्मृति की प्रथा के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी परिचलित रहने के बाद वर्ष 1000 ईपू के आसपास इसको लिखित रूप दिया गया होगा। इस निष्कर्ष के बहुत से प्रमाण मिलते हैं। रामायण की कहानी के संदर्भ निम्नलिखित रूप में उपलब्ध हैं- * कौटिल्य का अर्थशास्त्र (चौथी शताब्दी ईपू)* बौ‍द्ध साहित्य में दशरथ जातक (तीसरी शताब्दी ईपू)* कौशाम्बी में खुदाई में मिलीं टेराकोटा (पक्की मिट्‍टी) की मूर्तियां (दूसरी शताब्दी ईपू)* नागार्जुनकोंडा (आंध्रप्रदेश) में खुदाई में मिले स्टोन पैनल (तीसरी शताब्दी)* नचार खेड़ा (हरियाणा) में मिले टेराकोटा पैनल (चौथी शताब्दी)* श्रीलंका के प्रसिद्ध कवि कुमार दास की काव्य रचना 'जानकी हरण' (सातवीं शताब्दी)संदर्भ ग्रंथ :1. वाल्मीकि रामायण2. वैद युग एवं रामायण काल की ऐतिहासिकताजय श्री राम साभार ... 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Wed Dec 16th, 2020

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#ayodhyadhaamdarshan #ayodhyadhaam #Ayodhya #विश्व_हिन्दू_परिषद के माननीय भाईसाहब #श्री_चंपत_राय_जी , श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र में श्री राम जन्मभूमि निधि अभियान पर शाम 4 बजे दिनांक , 16 दिसंबर बुधवार को एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करेंगे। ... See MoreSee Less
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Tue Dec 15th, 2020

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#ayodhyadhaamdarshan #ayodhyadhaam #Ayodhya m.facebook.com/story.php?story_fbid=139875227706476&id=992446360830471 ... See MoreSee Less
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Mon Dec 14th, 2020

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#ayodhyadhaamdarshan #ayodhyadhaam #Ayodhya अयोध्या-श्री नृपेन्द्र मिश्र की अध्यक्षता में गठित राम जन्मभूमि मन्दिर निर्माण समिति ने अयोध्या में श्री राम मंदिर के लिए नींव डिजाइन की समीक्षा और सिफारिशों के लिए संबंधित क्षेत्र में प्रतिष्ठित इंजीनियरों की एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है,इस समिति के गठन का उद्देश्य मन्दिर निर्माण हेतु विभिन्न स्रोतों से आए सभी विभिन्न भू-तकनीकी सुझावों को ध्यान में रखते हुए उच्चतम गुणवत्ता और दीर्घायु के साथ मंदिर का निर्माण करना है।- श्रीरामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट ... See MoreSee Less
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Mon Dec 14th, 2020

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#Ayodhya #ayodhyadhaamdarshan #ayodhyadhaam आप सभी को सादर प्रणाम । श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़ी इतिहास की सच्चाइयों को सर्वोच्च अदालत ने स्वीकार किया । भारत सरकार ने न्यायालय के निर्देश पर श्रीराम जन्मभूमि के लिए Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra नाम से ट्रस्ट गठित किया । माननीय प्रधान मंत्री Narendra Modi जी ने 5 अगस्त को अयोध्या में पूजन करके मंदिर निर्माण की प्रक्रिया को गति प्रदान की है । आप इन तथ्यों से परिचित हैं । मंदिर के वास्तु का दायित्व अहमदाबाद के चंद्रकान्त सोमपुरा जी पर है । वे वर्ष १९८६ से जन्मभूमि मन्दिर निर्माण की देखभाल कर रहे हैं । ”लार्सन टुब्रो कम्पनी“ को मंदिर निर्माण का कार्य दिया है, निर्माता कंपनी के सलाहकार के रूप में ट्रस्ट ने “टाटा कंसल्टेंट इंजीनियर्स" को चुना है । संपूर्ण मंदिर पत्थरों से बनेगा । मन्दिर तीन मंज़िला होगा । प्रत्येक मंज़िल की ऊँचाई 20 फ़ीट होगी, मंदिर की लंबाई 360 फ़ीट तथा चौड़ाई 235 फ़ीट है, भूतल से 16.5 फ़ीट ऊँचा मंदिर का फ़र्श बनेगा, भूतल से गर्भ गृह के शिखर की ऊँचाई 161 फीट होगी । धरती के नीचे 200 फीट गहराई तक मृदा परीक्षण तथा भविष्य के सम्भावित भूकम्प के प्रभाव का अध्ययन हुआ है । ज़मीन के नीचे 200 फीट तक भुरभुरी बालू पायी गयी है, गर्भगृह के पश्चिम में कुछ दूरी पर ही सरयू नदी का प्रवाह है । इस भौगोलिक परिस्तिथि में 1000 वर्ष आयु वाले पत्थरों के मन्दिर का भार सहन कर सकने वाली मज़बूत व टिकाऊ नींव की ड्राइंग पर आई आई टी बंबई, आई आई टी दिल्ली, आई आई टी चेन्नई, आई आई टी गुवाहाटी, केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान रुड़की, लार्सन टूब्रो व टाटा के इंजीनियर आपस में परामर्श कर रहे हैं । बहुत शीघ्र नीव का प्रारूप तैय्यार होकर नीव निर्माण कार्य प्रारम्भ होगा । भारत वर्ष की वर्तमान पीढ़ी को इस मंदिर के इतिहास की सच्चाइयों से अवगत कराने की योजना बनी है । देश की कम से कम आधी आबादी को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की एतिहासिक सच्चाई से अवगत कराने के लिये देश के प्रत्येक कोने में घर घर जाकर संपर्क करेंगे, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, अंडमान निकोबार, रणकच्छ, त्रिपुरा सभी कोनों पर जाएँगे, समाज को राम जन्मभूमि के बारे में पढ़ने के लिए साहित्य दिया जाएगा, देश में गहराई तक इच्छा है कि भगवान की जन्मभूमि पर मंदिर बने । जिस प्रकार जन्मभूमि को प्राप्त करने के लिये लाखों भक्तों ने कष्ट सहे, सतत सक्रिय रहे, सहयोग किया, उसी प्रकार करोड़ों लोगों के स्वैच्छिक सहयोग से मन्दिर बने । स्वाभाविक है जब जनसंपर्क होगा लाखों कार्यकर्ता गाँव और मोहल्लों में जाएँगे तो समाज स्वेच्छा से कुछ न कुछ निधि समर्पण करेगा । भगवान का काम है, मन्दिर भगवान का घर है, भगवान के कार्य में धन बाधा नहीं हो सकता, समाज का समर्पण कार्यकर्ता स्वीकार करेंगे, आर्थिक विषय में पारदर्शिता बहुत आवश्यक है, पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हमने दस रुपया, सौ रुपया, एक हज़ार रुपया के कूपन व रसीदें छापी हैं । समाज जैसा देगा उसी के अनुरूप कार्यकर्ता कूपन या रसीद देंगे । करोड़ों घरों में भगवान के मंदिर का चित्र पहुँचेगा । जनसंपर्क का यह कार्य मकर संक्रांति से प्रारंभ करेंगे और माघ पूर्णिमा तक पूर्ण होगा। लाखों रामभक्त इस ऐतिहासिक अभियान के लिये अपना पूर्ण समय समर्पित करें, यह निवेदन है । पुनः प्रणाम ।-चंपत राय महासचिव श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ... See MoreSee Less
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Fri Dec 4th, 2020

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#ayodhyadhaamdarshan#ayodhyadhaam#Ayodhyayoutu.be/10RSrXPXRwU ... See MoreSee Less
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Fri Dec 4th, 2020

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#ayodhyadhaamdarshan#ayodhyadhaam#Ayodhyawww.facebook.com/110792943819266/posts/211119030453323/हरि ॐ🚩🚩 . पूज्य महाराज श्री सादर चरण वंदन।- आशा करता हूं कि आप तथा आश्रम वासी स्वस्थ व प्रसन्न होंगे । अयोध्या में हम सब भी स्वस्थ हैं , मंदिर निर्माण कार्य के लिए Larsen toubro (लार्सन टूब्रो)के साथ अनुबंध पत्र पर हस्ताक्षर हो गए हैं। तथा निर्माण में सलाहकार के लिए टाटा की कम्पनी टाटा इंजीनियर्स को लिया है , इनके साथ भी अनुबंध पत्र पर हस्ताक्षर हो गये हैं ।सरयू नदी के निकट मंदिर का निर्माण होने के कारण तथा भूमि के नीचे 200 फीट गहराई तक भुरभुरी बालू होने के कारण मजबूत नींव की ड्राइंग पर इंजीनियर आपस में चर्चा कर रहे हैं! चर्चा की इन बैठकों में पूज्य स्वामी गोविंददेव गिरी जी महाराज भी उपस्थित रहे हैं ,सामूहिक निर्णय के पश्चात नीव के निर्माण का कार्य शीघ्र प्रारम्भ हो सकेगा ।। सादर प्रणाम चम्पत राय 4.12.2020 ... See MoreSee Less
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Mon Nov 30th, 2020

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#ayodhyadhaamdarshan#Ayodhya#ayodhyadhaamश्री काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर परियोजना स्थल का भ्रमण करते आदरणीय प्रधानमंत्री जी... ... See MoreSee Less
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Mon Nov 23rd, 2020

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#Ayodhya ... See MoreSee Less
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Sun Nov 15th, 2020

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#ayodhyadhaamdarshan#Ayodhya#ayodhyadhaamyoutu.be/YSjUoxXA35A ... See MoreSee Less
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Wed Nov 11th, 2020

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#ayodhyadhaamdarshan#ayodhyadhaam#Ayodhya ... See MoreSee Less
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Wed Nov 11th, 2020

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#ayodhyadhaamdarshan#ayodhyadhaam#Ayodhyaस्वयंसेवकों के सहयोग से गाँव-गाँव व घर-घर से राम मन्दिर के लिए निधि संग्रह करेगी विहिपजयपुर, 10 नवम्बर । जन जन के आराध्य प्रभु श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र द् अयोध्या में बन रहे भव्य श्रीराम मंदिर के लिए विश्व हिन्दू परिषद स्वयंसेवकों के सहयोग से देश के चार लाख गांवों में घर—घर सम्पर्क कर के आर्थिक सहयोग जुटाएगी। विहिप के अनुसार इस महाअभियान को सफल बनाने के लिए उन्होंने स्वयंसेवकों से भी सहयोग चाहा है। इसकी रूपरेखा तय करने के लिए कल जयपुर में संघ के सरकार्यवाह सुरेश भय्याजी जोशी के साथ विहिप के अखिल भारतीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार राजस्थान क्षेत्र के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को साथ लेकर उनसे चर्चा की। आर्थिक सहयोग जुटाने के काम में विहिप अपने कार्यकर्ताओं के साथ संघ के स्वयंसेवकों व विविध सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं का भी सहयोग लेगी। बैठक में मंदिर निर्माण में प्रत्येक घर की भागीदारी हो, इसके लिए सभी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की योजना पर बातचीत हुई। इस अभियान के अर्न्तगत देशभर के चार लाख गांव में रहने वाले 11 करोड़ परिवारों से संपर्क किया जाएगा। प्रति व्यक्ति से 10 रुपये और प्रति परिवार से 100 रुपये की सहयोग राशि ली जाएगी। इसके माध्यम से कार्यकर्ता समाज के लोगों से सजीव सम्पर्क कर राम मंदिर निर्माण से जोड़ने का कार्य करेंगे। उल्लेखनीय है कि 1990 में राम मंदिर निर्माण के लिए देश भर से सवा सवा रुपये लिया गया था। लेकिन अब यह सवा रुपया 100 रुपये के बराबर हो गया है। इसलिए अब एक बार पुनः कार्यकर्ता देश में विभिन्न कार्यक्रमों के निमित समाज जागरण करने के साथ हर घर से 100 रुपये व हर व्यक्ति से 10 रुपये का सहयोग जुटाएगा। बैठक में विहिप के क्षेत्रीय मंत्री सुरेश उपाध्याय, संगठन मंत्री गोपालकृष्ण समेत संघ के तीनों प्रान्तों के प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित रहे। ... See MoreSee Less
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Wed Nov 4th, 2020

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#ayodhyadhaamdarshan#ayodhyadhaam#Ayodhyawww.facebook.com/110792943819266/posts/196231985275361/श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र परिसर निर्माण हेतु सुझाव सहृदय सादर आमंत्रित हैं। श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र जन्मभूमि परिसर के 70 एकड़ क्षेत्र के मास्टरप्लान हेतु सभी विद्वतजनों, वास्तुविदों के सुझाव आमन्त्रित करता है। यह सुझाव परिसर के विभिन्न आयामों जैसे धार्मिक यात्रा, संस्कृति, विज्ञान आदि को समाहित करते हुए होने चाहिए। इस से सम्बंधित सभी जानकारी ट्रस्ट की वेबसाइट srjbtkshetra.org/ पर उपलब्ध है। सुझावों को स्वीकार अथवा अस्वीकार करने का ट्रस्ट के निर्णय अंतिम होगा।सभी बन्धुओं, वास्तुविदों, विषय के विद्वानों से हमारा निवेदन है कि 25 नवम्बर 2020 तक अपने सुझाव और विचार निम्नलिखित ईमेल पर अवश्य भेज दें।suggestions@srjbtkshetra.orgaida.rjbayayodhya@gmail.comdesign@tce.co.in ... See MoreSee Less
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Tue Nov 3rd, 2020

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#ayodhyadhaamdarshan#ayodhyadhaam#Ayodhyayoutu.be/rWcGlaC0jRk ... See MoreSee Less
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