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Fri Feb 9th, 2024

Ayodhyadhaam
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Thu Feb 8th, 2024

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#ayodhyadhaam #Ayodhya प्रभु श्री बालक राम मंदिर प्रांगण अयोध्या में भगवान श्री सूर्य नारायण धीरे धीरे अस्ताचल की ओर....... अद्भुत ,अद्वितीय, मनोरम ,भव्य,दिव्य-दर्शन ... See MoreSee Less
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Mon Feb 5th, 2024

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#ayodhyadhaam #Ayodhya fb.watch/q0qXf4WbwX/?mibextid=Nif5oz ... See MoreSee Less
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Sun Feb 4th, 2024

Ayodhyadhaam
#ayodhyadhaam #Ayodhya यह 1914 का है, एशमोलियन संग्रहालय, ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय से काशी के बारे में वुडब्लॉक प्रिंट जिसे तब बनारस कहा जाता था। काशी विश्वनाथ मंदिर का एक पुराना नक्शा। ... See MoreSee Less
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Thu Jan 11th, 2024

Ayodhyadhaam
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Wed Jan 10th, 2024

Ayodhyadhaam
#ayodhyadhaam #Ayodhya *लंका में अशोक वाटिका में* *जिस पत्थर के ऊपर माता सीता जी बैठती थी* *उस पत्थर को श्रीलंका सरकार ने* *अपने हवाई जहाज से भारत भेजा*।*_इस पत्थर को अयोध्या जी में राम जन्मभूमि पर बना रहे नए राम मंदिर में स्थापित किया जाएगा।_**इस पत्थर को लेने के लिए योगी आदित्यनाथ स्वयं एयरपोर्ट पहुंचे।* ... See MoreSee Less
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Wed Jan 10th, 2024

Ayodhyadhaam
#ayodhyadhaam #ayodhya अयोध्या और राममंदिर से रहा है गोरक्षपीठ के तीन पीढ़ियों का नाता... यह नाता करीब 100 साल पुराना है इस दौरान राममंदिर को लेकर होने वाले हर आंदोलन में तबके पीठाधीश्वरों की केंद्रीय भूमिका रही है गोरखपुर स्थित इस पीठ के मौजूदा पीठाधीश्वर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं उनके दादा गुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजय नाथ और पूज्य गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ ने जिस अयोध्या और वहां जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर का सपना देखा था जिस सपने के लिए संघर्ष किया था वह 22जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के साथ साकार होने को है...*ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ ने दिया मंदिर आंदोलन को संगठित रूप*...यूं तो श्रीराम जन्मभूमि स्थित मंदिर पर फिर से रामलला आंदोलन विराजमान हों इस बाबत छिटपुट संघर्ष की शुरुआत इसको गिराए जाने के बाद से ही शुरू हो गया था मुगल काल से लेकर ब्रिटिश काल के गुलामी के दौर और आजाद भारत का करीब 500 साल का कालखंड इसका प्रमाण है इन सारे संघर्षों और इसके लिए खुद को बलिदान देने वालों के दस्तावेजी सबूत भी हैं लेकिन आजादी के बाद इसे पहली बार रणनीति रूप से संगठित स्वरूप और एक व्यापकाधार देने श्रेय गोरखपुर स्थित गोरक्षपीठ के वर्तमान पीठाधीश्वर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दादा गुरु ब्रह्मलीन गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत दिग्विजयनाथ को जाता है 1935 में गोरक्ष पीठाधीश्वर बनने के बाद से ही उन्होंने इस बाबत प्रयास शुरू कर दिया था इस क्रम में उन्होंने अयोध्या के अलग अलग मठों के साधु संतों को एकजुट करने के साथ ही जातीय विभेद से परे हिंदुओ को समान भाव व सम्मान के साथ जोड़ा 22/23 दिसंबर 1949 को प्रभु श्रीरामलला के विग्रह के प्रकटीकरण के नौ दिन पूर्व ही महंत दिग्विजयनाथ के नेतृत्व में अखंड रामायण के पाठ का आयोजन शुरू हो चुका था श्रीरामलला के प्राकट्य पर महंत जी खुद वहां मौजूद थे प्रभु श्रीराम के विग्रह के प्रकटीकरण के बाद मामला अदालत पहुंचा इसके चलते विवादित स्थल पर ताला भले जड़ दिया गया पर पहली बार वहां पुजारियों को दैनिक पूजा की अनुमति भी मिल गईश्रीरामलला के प्रकटीकरण के बाद मंदिर आंदोलन को एक नई दिशा देने वाले महंत दिग्विजयनाथ 1969 में महासमाधि लेने तक श्रीराम जन्मभूमि के उद्धार के लिए अनवरत प्रयास करते रहे ये आजादी के बाद के दिन थे कांग्रेस की आंधी चल रही थी खुद को धर्म निरपेक्ष घोषित करने की होड़ मची थी तब हिंदू और हिंदुत्व की बात करने का मतलब अराराष्ट्रीय होना था इस होड़ में कई लोग तो करोड़ों के आराध्य प्रभु श्रीराम के वजूद को ही नकार रहे थे ऐसी विषम परिस्थितियों में भी पूरी निर्भीकता से दिग्विजय नाथ सदन से लेकर संसद और सड़क तक हिंदू, हिंदुत्व और राम मंदिर की मुखर आवाज बन गए.... *राममंदिर आंदोलन के सर्व स्वीकार्य अगुआ थे ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ*...जिस मंदिर आंदोलन को महंत दिग्विजयनाथ ने एक ठोस बुनियाद और व्यापक आधार दिया उसे उनके ब्रह्मलीन होने के बाद उनके शिष्य एवं उत्तराधिकारी महंत अवेद्यनाथ की अगुआई में नई ऊंचाई मिली अस्सी के दशक के शुरूआत के साथ श्रीराम जन्मभूमि को लेकर ब्रह्मलीन महंत दिग्विजय नाथ ने जो बीज बोया था वह अंकुरित हो चुका था इसे बढ़ाने में सबसे बड़ी बाधा अलग अलग पंथ और संप्रदाय के संत समाज की मत भिन्नता थी इन सबको संत समाज का वही एक कर सकता था जो सबको स्वीकार्य हो यह सर्व स्वीकार्यता बनी तबके गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ के पक्ष में इसी सर्वसम्मति का परिणाम था कि 21 जुलाई 1984 को अयोध्या के वाल्मीकि भवन में जब श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति का गठन हुआ तो महंत अवेद्यनाथ समवेत स्वर से इसके अध्यक्ष चुने गए और उनके नेतृत्व में देश में ऐसे जनांदोलन का उदय हुआ जिसने देश का सामाजिक-राजनीतिक समीकरण बदल दिया उनकी अगुआई में शुरू श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन आजादी के बाद का सबसे बड़ा और प्रभावी आंदोलन था श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के गठन के बाद 7 अक्टूबर 1984 को अयोध्या के सरयू तट से धर्मयात्रा निकाली गई जो 14 अक्टूबर 1984 को लखनऊ पहुंची यहां के बेगम हजरत महल पार्क में ऐतिहासिक सम्मेलन हुआ जिसमें लाखों लोग शामिल हुए महंत अवेद्यनाथ की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन से तत्कालीन सरकार हिल गई तबके मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी से महंत जी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की और मांग पत्र सौंपा धर्मचार्यों के आह्वान पर 22 सितंबर 1989 को दिल्ली के बोट क्लब पर विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया महंत जी की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन में जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए 9 नवंबर 1989 को शिलान्यास का ऐलान कर दिया गया बोट क्लब की इस रैली से पूर्व 20 सितंबर 1989 को भारत सरकार के तत्कालीन गृहमंत्री बूटा सिंह ने महंत जी से बातचीत का आग्रह किया था लेकिन महंत जी ने रैली के बाद ही बातचीत संभव होने की बात कही 25 सितंबर को मुलाकात हुई तो बूटा सिंह ने शिलान्यास कार्यक्रम स्थगित करने का निवेदन किया लेकिन महंत जी निर्णय पर अडिग रहे इसके बाद लखनऊ में बूटा सिंह, तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने महंत जी, महंत नृत्यगोपाल दास, अशोक सिंहल, दाऊदयाल खन्ना के साथ बैठक कर आग्रह किया पर, महंत जी ने दो टूक कहा कि यह राष्ट्रीय सम्मान एवं हिंदू समाज की आस्था का सवाल है और इससे समझौता नहीं किया जा सकता इसके बाद देशभर में शिलान्यास समारोह के लिए श्रीराम शिला पूजन का अभियान प्रारंभ हो गया महंत अवेद्यनाथ की अगुवाई में देशभर के गांव-गांव से श्रीराम शिला पूजन कर अयोध्या के लिए चल पड़ी खुद महंत जी दर्जनों कार्यक्रमों में शामिल हुए शिलान्यास समारोह की तैयारियों से घबराई सरकार ने एक बार फिर महंत जी को 8 नवंबर को गोरखपुर विशेष विमान भेजकर बातचीत के लिए लखनऊ आमंत्रित किया वार्ता के बाद महंत जी को अयोध्या पहुंचाया गया उनके अयोध्या पहुंचने पर शिलान्यास का कार्य तेजी से अंजाम की ओर आगे बढ़ा शुभ मुहूर्त में गर्भगृह के बाहर निर्धारित स्थान पर भूमि पूजन और हवन के बाद महंत जी ने सांकेतिक रूप से नींव खोदकर दलित कामेश्वर प्रसाद चौपाल से पहली शिला रखवाकर एक नए भविष्य की शुरुआत कीगर्भगृह के बाहर शिलान्यास के बाद मंदिर निर्माण के लिए कारसेवा का दौर प्रारंभ हुआ महंत अवेद्यनाथ की अगुवाई में हिंदू समाज तन, मन, धन से कारसेवा के लिए समर्पित होने लगा 30 अक्टूबर 1990 और 2 नवंबर 1990 को कारसेवा के दौरान तत्कालीन सरकार के आदेश पर पुलिस फायरिंग में कई रामभक्त बलिदान ही गए पर, दमनात्मक कार्रवाई के बावजूद महंत अवेद्यनाथ के नेतृत्व में आंदोलन को अंजाम तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया नारा दियागया"बच्चा-बच्चा राम का".,...*शांतिपूर्ण समाधान के लिए हर सरकार को दिया मौका*...1984 में श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के गठन के बाद से आंदोलन के निर्णायक होने तक महंत अवेद्यनाथ ने हर सरकार को शांतिपूर्ण समाधान का मौका दिया तत्कालीन प्रधानमंत्रियों राजीव गांधी, वीपी सिंह, चंद्रशेखर, पीवी नरसिम्हा राव से समय-समय पर उनकी वार्ता भी हुई सरकारें कोरे आश्वासन से आगे नहीं बढ़ती थीं और महंत जी जन्मभूमि को मुक्त कराने के संकल्प पर अडिग रहे...*श्रीराम जन्मभूमि की मुक्ति को हुआ राजनीति में दोबारा प्रवेश*....तत्कालीन मानीराम विधानसभा क्षेत्र से लगातार पांच बार, 1962 से लेकर 1977 तक के चुनाव में विधायक चुने गए महंत अवेद्यनाथ 1969 में अपने गुरु महंत दिग्विजयनाथ के ब्रह्मलीन होने के बाद रिक्त हुए गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र के उप चुनाव में सांसद चुने गए 1980 में मीनाक्षीपुरम में धर्मांतरण की घटना के बाद उन्होंने राजनीति की बजाय खुद को सामाजिक समरसता के अभियान में समर्पित कर दिया सितंबर 1989 में महंत अवेद्यनाथ के नेतृत्व में दिल्ली में हुए विराट हिंदू सम्मेलन के दौरान जब मंदिर शिलान्यास की तारीख घोषित कर दी गई तो तत्कालीन गृहमंत्री बूटा सिंह ने उन्हें यह कहकर चुनौती दे दी कि अपनी बात रखनी है तो संसद में आइए इस चुनौती को को स्वीकार कर महंत अवेद्यनाथ ने दोबारा राजनीति में प्रवेश करने का निर्णय लिया फिर तो वह ताउम्र सड़क से लेकर संसद तक अयोध्या में दिव्य और भव्य मंदिर की आवाज बने रहे उनका एक मात्र सपना भी यही था, उनके जीते जी ऐसा हो आज वह भले ब्रह्मलीन हो चुके हैं, पर अपने सुयोग्य शिष्य की देख रेख में 22जनवरी को होने वाले प्राण प्रतिष्ठा समारोह को देख उनकी आत्मा जरूर खुश हो रही होगी...*दादागुरु और गुरुदेव के सपनों और संघर्षों को मूर्त कर रहे योगी आदित्यनाथ*....बतौर उत्तराधिकारी महंत अवेद्यनाथ के साथ दो दशक से लंबा समय गुजारने वाले उत्तर प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी इस पूरे परिवेश की छाप पड़ी बतौर सांसद उन्होंने अपने गुरु के सपने को स्वर्णिम आभा दी मुख्यमंत्री होने के बावजूद अपनी पद की गरिमा का पूरा खयाल रखते हुए कभी राम और रामनगरी से दूरी नहीं बनाई गुरु के सपनों को अपना बना लिया नतीजा सबके सामने है उनके मुख्यमंत्री रहते हुए ही राम मंदिर के पक्ष में देश की शीर्ष अदालत का फैसला आया देश और दुनिया के करोड़ों रामभक्तों, संतों, धर्माचार्यों की मंशा के अनुसार योगी की मौजूदगी में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जन्मभूमि पर भव्य एवं दिव्य राम मंदिर की नींव रखी युद्ध स्तर इसका जारी निर्माण अब पूर्णता की ओर है...*त्रेतायुगीन वैभव से सराबोर की जा रही अयोध्या*...बतौर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जितनी बार गए, अयोध्या को कुछ न कुछ सौगात देकर आए उनकी मंशा अयोध्या को दुनिया का सबसे खूबसूरत पर्यटन स्थल बनाने की है इसके अनुरूप ही अयोध्या के कायाकल्प का काम जारी है योगी सरकार की मंशा है कि अयोध्या उतनी ही भव्य दिखे जितनी त्रेता युग में थी इसकी कल्पना गोस्वामी तुलसीदास ने कुछ इस तरह की है 'अवधपुरी अति रुचिर बनाई देवन्ह सुमन बृष्टि झरि लाई' अयोध्या के इस स्वरूप की एक झलक दीपोत्सव के दौरान दिखती भी है कायाकल्प के बाद यह स्वरूप स्थायी हो जाएगा तब भगवान श्रीराम की अयोध्या कुछ वैसी ही होगी जिसका वर्णन उन्होंने खुद कभी इस तरह किया था 'अवधपुरी सम प्रिय नहिं सोऊ, यह प्रसंग जानइ कोउ कोऊ, जन्मभूमि मम पुरी सुहावनि, उत्तर दिसि बह सरजू पावनि'... ... 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Mon Jan 8th, 2024

Ayodhyadhaam
#ayodhyadhaam #Ayodhya ये चित्र 9 नवम्बर 1989 का है जब अयोध्या आन्दोलन के हनुमान अशोक सिंघल जी ने माथे पर इट लेकर राम लला मन्दिर के शिलान्यास के लिए अयोध्या कूच किया था। काश आज अशोक सिंघल जी जीवित होते और अपनी आंखों से उस राम लला का मन्दिर देख पाते जिसके निर्माण के लिए अशोक सिंघल जी ने पूरा जीवन आहूत कर दिया। मित्रो अशोक सिंघल जी अयोध्या आंदोलन की धुरी थे ,उन्होंने ऑंखड़ो में बटे सन्तो से लेकर बिखरे हिन्दू समाज और दिशा हिंन युवा पीढ़ी सबको एक मति ओर एक गति से अयोध्या राम लला के लिए एक कर अयोध्या आंदोलन को हर सनातनी का आंदोलन बना दिया था,एक धनाढ्य उच्च शिक्षित परिवार में जन्मे अशोक सिंघल जी राम काज में ऐसे रमे की घर परिवार केरियर सब बनाना भूल गए और अविवाहित रहकर आखरी सांस तक राम लला को टेंट से हटाकर मन्दिर में बिठाने के लिए संघर्ष करते रहे। काश आज अशोक सिंघल जी जीवित होते और अयोध्या में अपने राम लला को भव्य मंदिर में बैठा देखते तो उनकी आंखों से सरयू मइया बह निकलती इतना संघर्ष किया था बाबूजी जी ने राम लला के लिए।मित्रो ये पोस्ट इसलिए लिखी मेने की तुम भूल न जाओ आज जो भव्य मंदिर बना है उसकी नींव में अशोक सिंघल जैसे अनेक दधिचियो कि हड्डी पर खड़ा है भव्य मंदिर ,इन नींव के पत्थरो को कभी मत भूलना ।जब भी अयोध्या मन्दिर का जिक्र होगा तब अयोध्या आंदोलन के हनुमान अशोक सिंघल जी अपने आप याद आएंगे । ... See MoreSee Less
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Mon Jan 8th, 2024

Ayodhyadhaam
#ayodhyadhaam #Ayodhya ... See MoreSee Less
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Thu Jan 4th, 2024

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Thu Jan 4th, 2024

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Thu Jan 4th, 2024

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Thu Jan 4th, 2024

Ayodhyadhaam
#ayodhyadhaam #Ayodhya *दक्षिण भारत में भी राम के प्रति ऐसी दीवानगी हो सकती है , ऐसी तो कल्पना भी नहीं थी। किंतु राम मंदिर प्रतिष्ठा से पूर्व यह सब साकार होते दिख रहा है।* ... See MoreSee Less
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Thu Jan 4th, 2024

Ayodhyadhaam
#ayodhyadhaam #Ayodhya Let us begin a cleanliness drive around our temples from 14th January… ... See MoreSee Less
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Thu Jan 4th, 2024

Ayodhyadhaam
#ayodhyadhaam #Ayodhya कृपा करके श्री राम लला जी स्थापना तक अपने नाम की डीपी रखें ... See MoreSee Less
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Thu Jan 4th, 2024

Ayodhyadhaam
#ayodhyadhaam #Ayodhya श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या जी में आने वाले रामभक्तों हेतु बन रही विशाल भव्य टेंट सिटी,सन्त आवास, सामूहिक आवास, भोजनालय, स्नानागार, शौचालय आदि की उत्तम व्यवस्थाश्रद्धालुओं को मिलेंगी निःशुल्क सुविधाएं ... See MoreSee Less
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Thu Jan 4th, 2024

Ayodhyadhaam
#ayodhyadhaam #Ayodhya आज शाम 7 बजे की प्रभु श्रीराम के मंदिर की भव्य तस्वीरें* राम दुआरे तुम रखवारे। होत ना आज्ञा बिनु पैसारे।।श्री अयोध्याधाम में 22 जनवरी 2024 को राममंदिर में प्रभु रामलला के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व मंदिर के सिंह द्वार पर विराजमान हुये हनुमान जी, गज,सिंह व गरूण देव भगवान। ... See MoreSee Less
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Thu Jan 4th, 2024

Ayodhyadhaam
#ayodhyadhaam #Ayodhya अयोध्या में निर्माणाधीन श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की विशेषताएं:1. मंदिर परम्परागत नागर शैली में बनाया जा रहा है।2. मंदिर की लंबाई (पूर्व से पश्चिम) 380 फीट, चौड़ाई 250 फीट तथा ऊंचाई 161 फीट रहेगी।3. मंदिर तीन मंजिला रहेगा। प्रत्येक मंजिल की ऊंचाई 20 फीट रहेगी। मंदिर में कुल 392 खंभे व 44 द्वार होंगे।4. मुख्य गर्भगृह में प्रभु श्रीराम का बालरूप (श्रीरामलला सरकार का विग्रह), तथा प्रथम तल पर श्रीराम दरबार होगा।5. मंदिर में 5 मंडप होंगे: नृत्य मंडप, रंग मंडप, सभा मंडप, प्रार्थना मंडप व कीर्तन मंडप6. खंभों व दीवारों में देवी देवता तथा देवांगनाओं की मूर्तियां उकेरी जा रही हैं।7. मंदिर में प्रवेश पूर्व दिशा से, 32 सीढ़ियां चढ़कर सिंहद्वार से होगा।8. दिव्यांगजन एवं वृद्धों के लिए मंदिर में रैम्प व लिफ्ट की व्यवस्था रहेगी।9. मंदिर के चारों ओर चारों ओर आयताकार परकोटा रहेगा। चारों दिशाओं में इसकी कुल लंबाई 732 मीटर तथा चौड़ाई 14 फीट होगी।10. परकोटा के चारों कोनों पर सूर्यदेव, मां भगवती, गणपति व भगवान शिव को समर्पित चार मंदिरों का निर्माण होगा। उत्तरी भुजा में मां अन्नपूर्णा, व दक्षिणी भुजा में हनुमान जी का मंदिर रहेगा।11. मंदिर के समीप पौराणिक काल का सीताकूप विद्यमान रहेगा।12. मंदिर परिसर में प्रस्तावित अन्य मंदिर- महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, निषादराज, माता शबरी व ऋषिपत्नी देवी अहिल्या को समर्पित होंगे।13. दक्षिण पश्चिमी भाग में नवरत्न कुबेर टीला पर भगवान शिव के प्राचीन मंदिर का जीर्णो‌द्धार किया गया है एवं तथा वहां जटायु प्रतिमा की स्थापना की गई है।14. मंदिर में लोहे का प्रयोग नहीं होगा। धरती के ऊपर बिलकुल भी कंक्रीट नहीं है।15. मंदिर के नीचे 14 मीटर मोटी रोलर कॉम्पेक्टेड कंक्रीट (RCC) बिछाई गई है। इसे कृत्रिम चट्टान का रूप दिया गया है।16. मंदिर को धरती की नमी से बचाने के लिए 21 फीट ऊंची प्लिंथ ग्रेनाइट से बनाई गई है।17. मंदिर परिसर में स्वतंत्र रूप से सीवर ट्रीटमेंट प्लांट, वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट, अग्निशमन के लिए जल व्यवस्था तथा स्वतंत्र पॉवर स्टेशन का निर्माण किया गया है, ताकि बाहरी संसाधनों पर न्यूनतम निर्भरता रहे।18. 25 हजार क्षमता वाले एक दर्शनार्थी सुविधा केंद्र (Pilgrims Facility Centre) का निर्माण किया जा रहा है, जहां दर्शनार्थियों का सामान रखने के लिए लॉकर व चिकित्सा की सुविधा रहेगी।19. मंदिर परिसर में स्नानागार, शौचालय, वॉश बेसिन, ओपन टैप्स आदि की सुविधा भी रहेगी।20. मंदिर का निर्माण पूर्णतया भारतीय परम्परानुसार व स्वदेशी तकनीक से किया जा रहा है। पर्यावरण-जल संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कुल 70 एकड़ क्षेत्र में 70% क्षेत्र सदा हरित रहेगा ... See MoreSee Less
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Tue Jan 2nd, 2024

Ayodhyadhaam
विदेशी वर्ष पर कैसा हर्षभारतीय नववर्ष मनाएं,चैत्र शुक्ल प्रतिपदा,विक्रम संवत 2081,(9अप्रैल 2024,इस वर्ष ) ... See MoreSee Less
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Fri Dec 29th, 2023

Ayodhyadhaam
#ayodhyadhaam #Ayodhya Maharshi Valmiki International Airport Ayodhya Dham ... See MoreSee Less
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Fri Dec 29th, 2023

Ayodhyadhaam
#ayodhya #ayodhyadhaam अयोध्या:वन्दे भारत अयोध्या से आनन्द विहार टर्मिनल तक सप्ताह में छः दिन चलेगी,**समय सारिणी-*अयोध्या से प्रस्थान 15:15लखनऊ आगमन 17:15 प्रस्थान 17:25कानपुर आगमन 18:35 प्रस्थान 18:40आनन्द विहार टर्मिनल समय 23:40 पर पहुँचेगी। *वापसी-*आनन्द विहार टर्मिनल से प्रस्थान 06:10कानपुर आगमन 11:10 प्रस्थान 11:12लखनऊ आगमन 12:25 प्रस्थान 12:35अयोध्या समय 14:35 पर पहुँचेगी। ... See MoreSee Less
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Mon Dec 25th, 2023

Ayodhyadhaam
#ayodhyadhaam #Ayodhya ... See MoreSee Less
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Mon Dec 25th, 2023

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#ayodhyadhaam #Ayodhya ... See MoreSee Less
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