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84 कोसी परिक्रमा मार्ग को मिली बड़ी सौगात, सरयू पर श्रृंगी ऋषि आश्रम पुल का निर्माण शुरू![]()
अयोध्या में 84 कोसी परिक्रमा मार्ग को फोरलेन के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इस परियोजना के अंतर्गत सरयू नदी पर श्रृंगी ऋषि आश्रम पुल का निर्माण कार्य औपचारिक रूप से शुरू हो गया है। यह पुल मया बाजार विकासखंड क्षेत्र में बनाया जा रहा है, जिससे बस्ती, अंबेडकरनगर, अयोध्या और गोंडा जिलों के लोगों को सीधा और सुगम आवागमन मिल सकेगा। साथ ही श्रृंगी ऋषि आश्रम आने वाले श्रद्धालुओं को भी अब बड़ी राहत मिलेगी।![]()
स्थानीय नागरिकों की ओर से सरयू नदी पर पुल निर्माण की मांग वर्षों से की जा रही थी। लंबे समय तक कोई ठोस पहल न होने से लोगों को यह लगने लगा था कि अब यहां पुल बन पाना संभव नहीं है। लेकिन 84 कोसी परिक्रमा मार्ग के फोरलेन निर्माण कार्य के साथ ही उसी स्थान पर पुल निर्माण शुरू होने से क्षेत्रवासियों की उम्मीदों को नया जीवन मिला है। यह वही मार्ग है, जहां से होकर परिक्रमा निकाली जाती है और साधु-संतों का आवागमन होता है।![]()
84 कोसी परिक्रमा की शुरुआत बस्ती जिले के मखौड़ा धाम से होती है, जहां राजा दशरथ ने पुत्रेष्टि यज्ञ किया था। परिक्रमा के दौरान साधु-संत हनुमान बाग होते हुए इसी मार्ग से श्रृंगी ऋषि आश्रम पहुंचते हैं। अब तक पुल न होने के कारण श्रद्धालुओं को सरयू नदी पार करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, जिससे यात्रा जोखिम भरी और समयसाध्य हो जाती थी।![]()
पुल के निर्माण से बस्ती, गोंडा और अयोध्या के बीच की दूरी काफी कम हो जाएगी। इससे न सिर्फ धार्मिक यात्राएं आसान होंगी, बल्कि व्यापार, सामाजिक संपर्क और आपसी रिश्तों को भी मजबूती मिलेगी। यह पुल करीब तीन हजार गांवों को प्रत्यक्ष रूप से जोड़ने वाला साबित होगा, जिससे पूरे क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी।![]()
अयोध्या और बस्ती का आपसी जुड़ाव सदियों पुराना है, लेकिन अब तक पुल के अभाव में लोगों को टांडा जैसे मार्गों से होकर लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। 84 कोसी परिक्रमा मार्ग पर इस पुल के बन जाने से यह परेशानी समाप्त हो जाएगी। स्थानीय लोगों का मानना है कि इससे श्रृंगी ऋषि आश्रम में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी और क्षेत्र धार्मिक व आर्थिक दृष्टि से और अधिक समृद्ध होगा।
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अयोध्या रिंग रोड परियोजना ने पकड़ी रफ्तार, 2028 से फर्राटा भरेंगे वाहन, कनेक्टिविटी और विकास को मिलेगा नया आयाम![]()
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अयोध्या। रामनगरी में बहुप्रतीक्षित रिंग रोड परियोजना अब तेजी से आकार ले रही है। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अधिकांश स्थानों पर निर्माण कार्य न केवल शुरू हो चुका है, बल्कि तेज़ी से आगे भी बढ़ रहा है। तय समयसीमा के अनुसार वर्ष 2028 से इस रिंग रोड पर वाहनों की आवाजाही शुरू हो जाएगी। यह परियोजना अयोध्या की यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ-साथ पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति देने वाली मानी जा रही है।![]()
करीब 3418 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाला यह रिंग रोड लगभग 67.50 किलोमीटर लंबा और 60 मीटर चौड़ा होगा। परियोजना के अंतर्गत सात फ्लाईओवर, चार रेलवे ओवर ब्रिज, 16 वाहन अंडरपास, 11 बड़े पुल और 18 छोटे पुलों का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा सरयू नदी पर दो भव्य पुल भी बनाए जाएंगे, जो अयोध्या को बस्ती और गोंडा जनपद से सीधे जोड़ेंगे।![]()
रिंग रोड का पहला अंडरपास अयोध्या–अंबेडकरनगर हाईवे पर यश पेपर मिल से सिरसिंडा गांव के लिंक रोड के बीच आकार ले रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण कार्यदायी संस्था मेसर्स सीगल अयोध्या बाईपास हाइवे प्राइवेट लिमिटेड द्वारा कराया जा रहा है। सरयू नदी पर लगभग 4200 मीटर लंबे ओवरब्रिज के निर्माण के लिए भारी मशीनें लगाई गई हैं। यह पुल रामपुर हलवारा स्थित एनटीपीसी सोलर प्लांट के क्षेत्र से होकर बस्ती जिले को जोड़ेगा।![]()
अयोध्या के नयाघाट से दशरथ समाधि तक निर्माणाधीन फोरलेन मार्ग के ऊपर यह ओवरब्रिज अंडरपास के रूप में कार्य करेगा। इसके साथ ही ग्राम कटरौली, मगलसी, मऊ यदुवंशपुर और खानपुर मसौधा में अंडरपास निर्माण तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। वहीं हरिपुर जलालाबाद, हुंसेपुर, रायपुर मनापुर और खरगापुर में बंधा निर्माण का कार्य भी निरंतर प्रगति पर है।![]()
जिलाधिकारी निखिल टीकाराम फुंडे ने बताया कि रिंग रोड परियोजना के लिए आवश्यक समस्त भूमि का अधिग्रहण पूरा कर लिया गया है। वर्तमान समय में छह मेजर ब्रिज, दो माइनर ब्रिज, छह फ्लाईओवर और 13 वाहन अंडरपास पर एक साथ निर्माण कार्य चल रहा है। प्रशासन का दावा है कि तय समयसीमा में परियोजना को पूरा करने के लिए कार्यदायी संस्थाओं को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।![]()
रिंग रोड के पूर्ण होने के बाद अयोध्या शहर के भीतर यातायात दबाव कम होगा, बाहरी वाहनों को वैकल्पिक मार्ग मिलेगा और श्रद्धालुओं व पर्यटकों को सुगम आवागमन की सुविधा मिलेगी। साथ ही, यह परियोजना क्षेत्रीय विकास, निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी।
Ayodhya Ram Mandir का कार्य पूर्ण.. इस दिन से होगा दर्शन संपूर्ण ! | PM Modi | UP News
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Ayodhya Ram Mandir का कार्य पूर्ण.. इस दिन से होगा दर्शन संपूर्ण ! | PM Modi | UP News | CM Yogi Adityanath#ayodhyarammandir #ramm..."शताब्दी वर्ष श्री विजयादशमी उत्सव, युगाब्द 5127" #RSS100Years #RSS100 #sanghyatra #RSSNewHorizons
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ॐराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, नागपुर महानगर #RSS100Yearsशताब्दी वर्ष श्री विजयादशमी उ�...
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*श्री विजयादशमी उत्सव - पत्रकार वार्ता*![]()
अश्विन शुद्ध १ , 22 सितंबर 2025, रेशिमबाग नागपुर
समय - दोपहर 12.30 बजे![]()
लाइव लिंक - ॐ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नागपुर महानगर , श्री विजयादशमी उत्सव - पत्रकार वार्ता
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Three Day Lecture series organized on the occasion of the centenary year of RSS
*'100 Years of Sangh Journey - New Horizons'*
26-27-28 August, 2025 - Vigyan Bhavan#day1hi![]()
*#Day1*
*Date - 26 Aug 2025*
*Time - 5:30PM, Tuesday*
*Speaker: Dr. Mohan Bhagwat Ji, Sarsanghchalak, RSS*![]()
*Live Link* -
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श्री रामचन्द्र जी के १४ वर्षों की वनवास यात्रा का प्रामाणिक विवरण.....![]()
पुराने उपलब्ध प्रमाणों और राम अवतार जी के शोध और अनुशंधानों के अनुसार कुल १९५ स्थानों पर राम और सीता जी के पुख्ता प्रमाण मिले हैं जिन्हें ५ भागों में वर्णित कर रहा हूँ![]()
१.वनवास का प्रथम चरण गंगा का अंचल
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सबसे पहले राम जी अयोध्या से चलकर तमसा नदी (गौराघाट,फैजाबाद,उत्तर प्रदेश) को पार किया जो अयोध्या से २० किमी की दूरी पर है |
आगे बढ़ते हुए राम जी ने गोमती नदी को पर किया और श्रिंगवेरपुर (वर्त्तमान सिंगरोर,जिला इलाहाबाद )पहुंचे ...आगे 2 किलोमीटर पर गंगा जी थीं और यहाँ से सुमंत को राम जी ने वापस कर दिया ।
बस यही जगह केवट प्रसंग के लिए प्रसिद्ध है |
इसके बाद यमुना नदी को संगम के निकट पार कर के राम जी चित्रकूट में प्रवेश करते हैं|
वाल्मीकि आश्रम,मंडव्य आश्रम,भारत कूप आज भी इन प्रसंगों की गाथा का गान कर रहे हैं |
भारत मिलाप के बाद राम जी का चित्रकूट से प्रस्थान ,भारत चरण पादुका लेकर अयोध्या जी वापस |![]()
अगला पड़ाव श्री अत्रि मुनि का आश्रम
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२.बनवास का द्वितीय चरण दंडक वन(दंडकारन्य)
घने जंगलों और बरसात वाले जीवन को जीते हुए राम जी सीता और लक्षमण सहित सरभंग और सुतीक्षण मुनि के आश्रमों में पहुचते हैं |
नर्मदा और महानदी के अंचल में उन्होंने अपना ज्यादा जीवन बिताया ,पन्ना ,रायपुर,बस्तर और जगदलपुर में
तमाम जंगलों ,झीलों पहाड़ों और नदियों को पारकर राम जी अगस्त्य मुनि के आश्रम नाशिक पहुँचते हैं |
जहाँ उन्हें अगस्त्य मुनि, अग्निशाला में बनाये हुए अपने अशत्र शस्त्र प्रदान करते हैं |![]()
३.वनवास का तृतीय चरण गोदावरी अंचल
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अगस्त्य मुनि से मिलन के पश्चात राम जी पंचवटी (पांच वट वृक्षों से घिरा क्षेत्र ) जो आज भी नाशिक में गोदावरी के तट पर है यहाँ अपना निवास स्थान बनाये |यहीं आपने तड़का ,खर और दूषण का वध किया |
यही वो "जनस्थान" है जो वाल्मीकि रामायण में कहा गया है ...आज भी स्थित है नाशिक में
जहाँ मारीच का वध हुआ वह स्थान मृग व्यघेश्वर और बानेश्वर नाम से आज भी मौजूद है नाशिक में |
इसके बाद ही सीता हरण हुआ ....जटायु की मृत्यु सर्वतीर्थ नाम के स्थान पार हुई जो इगतपुरी तालुका नाशिक के ताकीद गाँव में मौजूद है |दूरी ५६ किमी नाशिक से |
इस स्थान को सर्वतीर्थ इसलिए कहा गया क्यों की यहीं पर मरणसन्न जटायु ने बताया था की सम्राट दशरथ की मृत्यु हो गई है ...और राम जी ने यहाँ जटायु का अंतिम संस्कार कर के पिता और जटायु का श्राद्ध तर्पण किया था |
यद्यपि भारत ने भी अयोध्या में किया था श्राद्ध ,मानस में प्रसंग है "भरत किन्ही दस्गात्र विधाना "![]()
४.वनवास का चतुर्थ चरण तुंगभद्रा और कावेरी के अंचल में
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सीता की तलाश में राम लक्षमण जटायु मिलन और कबंध बाहुछेद कर के ऋष्यमूक पर्वत की ओर बढे ....
रास्ते में पंपा सरोवर के पास शबरी से मुलाकात हुई और नवधा भक्ति से शबरी को मुक्ति मिली |जो आज कल बेलगाँव का सुरेवन का इलाका है और आज भी ये बेर के कटीले वृक्षों के लिए ही प्रसिद्ध है |
चन्दन के जंगलों को पार कर राम जी ऋष्यमूक की ओर बढ़ते हुए हनुमान और सुग्रीव से मिले ,सीता के आभूषण प्राप्त हुए और बाली का वध हुआ ....ये स्थान आज भी कर्णाटक के बेल्लारी के हम्पी में स्थित है |![]()
५.बनवास का पंचम चरण समुद्र का अंचल
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कावेरी नदी के किनारे चलते ,चन्दन के वनों को पार करते कोड्डीकराई पहुचे पर पुनः पुल के निर्माण हेतु रामेश्वर आये जिसके हर प्रमाण छेदुकराई में उपलब्ध है |सागर तट के तीन दिनों तक अन्वेषण और शोध के बाद राम जी ने कोड्डीकराई और छेदुकराई को छोड़ सागर पर पुल निर्माण की सबसे उत्तम स्थिति रामेश्वरम की पाई ....और चौथे दिन इंजिनियर नल और नील ने पुल बंधन का कार्य प्रारम्भ किया |
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प्रभु श्री बालक राम मंदिर प्रांगण अयोध्या में भगवान श्री सूर्य नारायण धीरे धीरे अस्ताचल की ओर....... अद्भुत ,अद्वितीय, मनोरम ,भव्य,दिव्य-दर्शन
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यह 1914 का है, एशमोलियन संग्रहालय, ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय से काशी के बारे में वुडब्लॉक प्रिंट जिसे तब बनारस कहा जाता था। काशी विश्वनाथ मंदिर का एक पुराना नक्शा।
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*लंका में अशोक वाटिका में*
*जिस पत्थर के ऊपर माता सीता जी बैठती थी*
*उस पत्थर को श्रीलंका सरकार ने*
*अपने हवाई जहाज से भारत भेजा*।
*_इस पत्थर को अयोध्या जी में राम जन्मभूमि पर बना रहे नए राम मंदिर में स्थापित किया जाएगा।_*
*इस पत्थर को लेने के लिए योगी आदित्यनाथ स्वयं एयरपोर्ट पहुंचे।*
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अयोध्या और राममंदिर से रहा है गोरक्षपीठ के तीन पीढ़ियों का नाता... यह नाता करीब 100 साल पुराना है इस दौरान राममंदिर को लेकर होने वाले हर आंदोलन में तबके पीठाधीश्वरों की केंद्रीय भूमिका रही है गोरखपुर स्थित इस पीठ के मौजूदा पीठाधीश्वर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं उनके दादा गुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजय नाथ और पूज्य गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ ने जिस अयोध्या और वहां जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर का सपना देखा था जिस सपने के लिए संघर्ष किया था वह 22जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के साथ साकार होने को है...
*ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ ने दिया मंदिर आंदोलन को संगठित रूप*...
यूं तो श्रीराम जन्मभूमि स्थित मंदिर पर फिर से रामलला आंदोलन विराजमान हों इस बाबत छिटपुट संघर्ष की शुरुआत इसको गिराए जाने के बाद से ही शुरू हो गया था मुगल काल से लेकर ब्रिटिश काल के गुलामी के दौर और आजाद भारत का करीब 500 साल का कालखंड इसका प्रमाण है इन सारे संघर्षों और इसके लिए खुद को बलिदान देने वालों के दस्तावेजी सबूत भी हैं लेकिन आजादी के बाद इसे पहली बार रणनीति रूप से संगठित स्वरूप और एक व्यापकाधार देने श्रेय गोरखपुर स्थित गोरक्षपीठ के वर्तमान पीठाधीश्वर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दादा गुरु ब्रह्मलीन गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत दिग्विजयनाथ को जाता है 1935 में गोरक्ष पीठाधीश्वर बनने के बाद से ही उन्होंने इस बाबत प्रयास शुरू कर दिया था इस क्रम में उन्होंने अयोध्या के अलग अलग मठों के साधु संतों को एकजुट करने के साथ ही जातीय विभेद से परे हिंदुओ को समान भाव व सम्मान के साथ जोड़ा 22/23 दिसंबर 1949 को प्रभु श्रीरामलला के विग्रह के प्रकटीकरण के नौ दिन पूर्व ही महंत दिग्विजयनाथ के नेतृत्व में अखंड रामायण के पाठ का आयोजन शुरू हो चुका था श्रीरामलला के प्राकट्य पर महंत जी खुद वहां मौजूद थे प्रभु श्रीराम के विग्रह के प्रकटीकरण के बाद मामला अदालत पहुंचा इसके चलते विवादित स्थल पर ताला भले जड़ दिया गया पर पहली बार वहां पुजारियों को दैनिक पूजा की अनुमति भी मिल गई
श्रीरामलला के प्रकटीकरण के बाद मंदिर आंदोलन को एक नई दिशा देने वाले महंत दिग्विजयनाथ 1969 में महासमाधि लेने तक श्रीराम जन्मभूमि के उद्धार के लिए अनवरत प्रयास करते रहे ये आजादी के बाद के दिन थे कांग्रेस की आंधी चल रही थी खुद को धर्म निरपेक्ष घोषित करने की होड़ मची थी तब हिंदू और हिंदुत्व की बात करने का मतलब अराराष्ट्रीय होना था इस होड़ में कई लोग तो करोड़ों के आराध्य प्रभु श्रीराम के वजूद को ही नकार रहे थे ऐसी विषम परिस्थितियों में भी पूरी निर्भीकता से दिग्विजय नाथ सदन से लेकर संसद और सड़क तक हिंदू, हिंदुत्व और राम मंदिर की मुखर आवाज बन गए.... *राममंदिर आंदोलन के सर्व स्वीकार्य अगुआ थे ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ*...
जिस मंदिर आंदोलन को महंत दिग्विजयनाथ ने एक ठोस बुनियाद और व्यापक आधार दिया उसे उनके ब्रह्मलीन होने के बाद उनके शिष्य एवं उत्तराधिकारी महंत अवेद्यनाथ की अगुआई में नई ऊंचाई मिली अस्सी के दशक के शुरूआत के साथ श्रीराम जन्मभूमि को लेकर ब्रह्मलीन महंत दिग्विजय नाथ ने जो बीज बोया था वह अंकुरित हो चुका था इसे बढ़ाने में सबसे बड़ी बाधा अलग अलग पंथ और संप्रदाय के संत समाज की मत भिन्नता थी इन सबको संत समाज का वही एक कर सकता था जो सबको स्वीकार्य हो यह सर्व स्वीकार्यता बनी तबके गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ के पक्ष में इसी सर्वसम्मति का परिणाम था कि 21 जुलाई 1984 को अयोध्या के वाल्मीकि भवन में जब श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति का गठन हुआ तो महंत अवेद्यनाथ समवेत स्वर से इसके अध्यक्ष चुने गए और उनके नेतृत्व में देश में ऐसे जनांदोलन का उदय हुआ जिसने देश का सामाजिक-राजनीतिक समीकरण बदल दिया उनकी अगुआई में शुरू श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन आजादी के बाद का सबसे बड़ा और प्रभावी आंदोलन था श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के गठन के बाद 7 अक्टूबर 1984 को अयोध्या के सरयू तट से धर्मयात्रा निकाली गई जो 14 अक्टूबर 1984 को लखनऊ पहुंची यहां के बेगम हजरत महल पार्क में ऐतिहासिक सम्मेलन हुआ जिसमें लाखों लोग शामिल हुए महंत अवेद्यनाथ की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन से तत्कालीन सरकार हिल गई तबके मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी से महंत जी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की और मांग पत्र सौंपा धर्मचार्यों के आह्वान पर 22 सितंबर 1989 को दिल्ली के बोट क्लब पर विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया महंत जी की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन में जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए 9 नवंबर 1989 को शिलान्यास का ऐलान कर दिया गया बोट क्लब की इस रैली से पूर्व 20 सितंबर 1989 को भारत सरकार के तत्कालीन गृहमंत्री बूटा सिंह ने महंत जी से बातचीत का आग्रह किया था लेकिन महंत जी ने रैली के बाद ही बातचीत संभव होने की बात कही 25 सितंबर को मुलाकात हुई तो बूटा सिंह ने शिलान्यास कार्यक्रम स्थगित करने का निवेदन किया लेकिन महंत जी निर्णय पर अडिग रहे इसके बाद लखनऊ में बूटा सिंह, तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने महंत जी, महंत नृत्यगोपाल दास, अशोक सिंहल, दाऊदयाल खन्ना के साथ बैठक कर आग्रह किया पर, महंत जी ने दो टूक कहा कि यह राष्ट्रीय सम्मान एवं हिंदू समाज की आस्था का सवाल है और इससे समझौता नहीं किया जा सकता इसके बाद देशभर में शिलान्यास समारोह के लिए श्रीराम शिला पूजन का अभियान प्रारंभ हो गया महंत अवेद्यनाथ की अगुवाई में देशभर के गांव-गांव से श्रीराम शिला पूजन कर अयोध्या के लिए चल पड़ी खुद महंत जी दर्जनों कार्यक्रमों में शामिल हुए शिलान्यास समारोह की तैयारियों से घबराई सरकार ने एक बार फिर महंत जी को 8 नवंबर को गोरखपुर विशेष विमान भेजकर बातचीत के लिए लखनऊ आमंत्रित किया वार्ता के बाद महंत जी को अयोध्या पहुंचाया गया उनके अयोध्या पहुंचने पर शिलान्यास का कार्य तेजी से अंजाम की ओर आगे बढ़ा शुभ मुहूर्त में गर्भगृह के बाहर निर्धारित स्थान पर भूमि पूजन और हवन के बाद महंत जी ने सांकेतिक रूप से नींव खोदकर दलित कामेश्वर प्रसाद चौपाल से पहली शिला रखवाकर एक नए भविष्य की शुरुआत की
गर्भगृह के बाहर शिलान्यास के बाद मंदिर निर्माण के लिए कारसेवा का दौर प्रारंभ हुआ महंत अवेद्यनाथ की अगुवाई में हिंदू समाज तन, मन, धन से कारसेवा के लिए समर्पित होने लगा 30 अक्टूबर 1990 और 2 नवंबर 1990 को कारसेवा के दौरान तत्कालीन सरकार के आदेश पर पुलिस फायरिंग में कई रामभक्त बलिदान ही गए पर, दमनात्मक कार्रवाई के बावजूद महंत अवेद्यनाथ के नेतृत्व में आंदोलन को अंजाम तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया नारा दियागया"बच्चा-बच्चा राम का".,...
*शांतिपूर्ण समाधान के लिए हर सरकार को दिया मौका*...
1984 में श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के गठन के बाद से आंदोलन के निर्णायक होने तक महंत अवेद्यनाथ ने हर सरकार को शांतिपूर्ण समाधान का मौका दिया तत्कालीन प्रधानमंत्रियों राजीव गांधी, वीपी सिंह, चंद्रशेखर, पीवी नरसिम्हा राव से समय-समय पर उनकी वार्ता भी हुई सरकारें कोरे आश्वासन से आगे नहीं बढ़ती थीं और महंत जी जन्मभूमि को मुक्त कराने के संकल्प पर अडिग रहे...
*श्रीराम जन्मभूमि की मुक्ति को हुआ राजनीति में दोबारा प्रवेश*....
तत्कालीन मानीराम विधानसभा क्षेत्र से लगातार पांच बार, 1962 से लेकर 1977 तक के चुनाव में विधायक चुने गए महंत अवेद्यनाथ 1969 में अपने गुरु महंत दिग्विजयनाथ के ब्रह्मलीन होने के बाद रिक्त हुए गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र के उप चुनाव में सांसद चुने गए 1980 में मीनाक्षीपुरम में धर्मांतरण की घटना के बाद उन्होंने राजनीति की बजाय खुद को सामाजिक समरसता के अभियान में समर्पित कर दिया सितंबर 1989 में महंत अवेद्यनाथ के नेतृत्व में दिल्ली में हुए विराट हिंदू सम्मेलन के दौरान जब मंदिर शिलान्यास की तारीख घोषित कर दी गई तो तत्कालीन गृहमंत्री बूटा सिंह ने उन्हें यह कहकर चुनौती दे दी कि अपनी बात रखनी है तो संसद में आइए इस चुनौती को को स्वीकार कर महंत अवेद्यनाथ ने दोबारा राजनीति में प्रवेश करने का निर्णय लिया फिर तो वह ताउम्र सड़क से लेकर संसद तक अयोध्या में दिव्य और भव्य मंदिर की आवाज बने रहे उनका एक मात्र सपना भी यही था, उनके जीते जी ऐसा हो आज वह भले ब्रह्मलीन हो चुके हैं, पर अपने सुयोग्य शिष्य की देख रेख में 22जनवरी को होने वाले प्राण प्रतिष्ठा समारोह को देख उनकी आत्मा जरूर खुश हो रही होगी...
*दादागुरु और गुरुदेव के सपनों और संघर्षों को मूर्त कर रहे योगी आदित्यनाथ*....
बतौर उत्तराधिकारी महंत अवेद्यनाथ के साथ दो दशक से लंबा समय गुजारने वाले उत्तर प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी इस पूरे परिवेश की छाप पड़ी बतौर सांसद उन्होंने अपने गुरु के सपने को स्वर्णिम आभा दी मुख्यमंत्री होने के बावजूद अपनी पद की गरिमा का पूरा खयाल रखते हुए कभी राम और रामनगरी से दूरी नहीं बनाई गुरु के सपनों को अपना बना लिया नतीजा सबके सामने है उनके मुख्यमंत्री रहते हुए ही राम मंदिर के पक्ष में देश की शीर्ष अदालत का फैसला आया देश और दुनिया के करोड़ों रामभक्तों, संतों, धर्माचार्यों की मंशा के अनुसार योगी की मौजूदगी में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जन्मभूमि पर भव्य एवं दिव्य राम मंदिर की नींव रखी युद्ध स्तर इसका जारी निर्माण अब पूर्णता की ओर है...
*त्रेतायुगीन वैभव से सराबोर की जा रही अयोध्या*...
बतौर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जितनी बार गए, अयोध्या को कुछ न कुछ सौगात देकर आए उनकी मंशा अयोध्या को दुनिया का सबसे खूबसूरत पर्यटन स्थल बनाने की है इसके अनुरूप ही अयोध्या के कायाकल्प का काम जारी है योगी सरकार की मंशा है कि अयोध्या उतनी ही भव्य दिखे जितनी त्रेता युग में थी इसकी कल्पना गोस्वामी तुलसीदास ने कुछ इस तरह की है 'अवधपुरी अति रुचिर बनाई देवन्ह सुमन बृष्टि झरि लाई' अयोध्या के इस स्वरूप की एक झलक दीपोत्सव के दौरान दिखती भी है कायाकल्प के बाद यह स्वरूप स्थायी हो जाएगा तब भगवान श्रीराम की अयोध्या कुछ वैसी ही होगी जिसका वर्णन उन्होंने खुद कभी इस तरह किया था 'अवधपुरी सम प्रिय नहिं सोऊ, यह प्रसंग जानइ कोउ कोऊ, जन्मभूमि मम पुरी सुहावनि, उत्तर दिसि बह सरजू पावनि'...
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ये चित्र 9 नवम्बर 1989 का है जब अयोध्या आन्दोलन के हनुमान अशोक सिंघल जी ने माथे पर इट लेकर राम लला मन्दिर के शिलान्यास के लिए अयोध्या कूच किया था। काश आज अशोक सिंघल जी जीवित होते और अपनी आंखों से उस राम लला का मन्दिर देख पाते जिसके निर्माण के लिए अशोक सिंघल जी ने पूरा जीवन आहूत कर दिया। मित्रो अशोक सिंघल जी अयोध्या आंदोलन की धुरी थे ,उन्होंने ऑंखड़ो में बटे सन्तो से लेकर बिखरे हिन्दू समाज और दिशा हिंन युवा पीढ़ी सबको एक मति ओर एक गति से अयोध्या राम लला के लिए एक कर अयोध्या आंदोलन को हर सनातनी का आंदोलन बना दिया था,एक धनाढ्य उच्च शिक्षित परिवार में जन्मे अशोक सिंघल जी राम काज में ऐसे रमे की घर परिवार केरियर सब बनाना भूल गए और अविवाहित रहकर आखरी सांस तक राम लला को टेंट से हटाकर मन्दिर में बिठाने के लिए संघर्ष करते रहे। काश आज अशोक सिंघल जी जीवित होते और अयोध्या में अपने राम लला को भव्य मंदिर में बैठा देखते तो उनकी आंखों से सरयू मइया बह निकलती इतना संघर्ष किया था बाबूजी जी ने राम लला के लिए।![]()
मित्रो ये पोस्ट इसलिए लिखी मेने की तुम भूल न जाओ आज जो भव्य मंदिर बना है उसकी नींव में अशोक सिंघल जैसे अनेक दधिचियो कि हड्डी पर खड़ा है भव्य मंदिर ,इन नींव के पत्थरो को कभी मत भूलना ।जब भी अयोध्या मन्दिर का जिक्र होगा तब अयोध्या आंदोलन के हनुमान अशोक सिंघल जी अपने आप याद आएंगे ।
मेरे राम राम धुन || Ram Dhun || Sant Trilochan Darshan Das Ji || Session With the Soul
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Nanak Naam Chardi Kala Tere Bhane Sarbat Da BhalaSpiritual Place Sachkhand Nanak Dham Loni Darbar das dharam Founder Maharaz Darshan Das ji and Present caret...
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*दक्षिण भारत में भी राम के प्रति ऐसी दीवानगी हो सकती है , ऐसी तो कल्पना भी नहीं थी। किंतु राम मंदिर प्रतिष्ठा से पूर्व यह सब साकार होते दिख रहा है।*
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Let us begin a cleanliness drive around our temples from 14th January…
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कृपा करके श्री राम लला जी स्थापना तक अपने नाम की डीपी रखें
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श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या जी में आने वाले रामभक्तों हेतु बन रही विशाल भव्य टेंट सिटी,
सन्त आवास, सामूहिक आवास, भोजनालय, स्नानागार, शौचालय आदि की उत्तम व्यवस्था
श्रद्धालुओं को मिलेंगी निःशुल्क सुविधाएं
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आज शाम 7 बजे की प्रभु श्रीराम के मंदिर की भव्य तस्वीरें* राम दुआरे तुम रखवारे। होत ना आज्ञा बिनु पैसारे।।
श्री अयोध्याधाम में 22 जनवरी 2024 को राममंदिर में प्रभु रामलला के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व मंदिर के सिंह द्वार पर विराजमान हुये हनुमान जी, गज,सिंह व गरूण देव भगवान।