भारतवर्ष में श्रीराम / ShriRam in Bharatvarsh

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कृष्ण राज नगर के निकट कावेरी नदी के किनारे चुन्चा-चुन्ची नामक राक्षस दम्पति को श्रीराम ने उचित शिक्षा देकर सात्विक
उत्तर प्रदेश में प्रयागराज जिले में टकटई गाँव से 3 कि.मी. तथा ऋषियन से 6 कि.मी. दूर जनवां में एक
बेंगरा अर्थात् रहने का स्थान। यहाँ श्रीसीताराम जी कुछ काल तक रहे हैं। पहाड़ी में ठीक पीछे लक्ष्मण बंेगरा है।
नन्दीग्राम में भरतजी ने 14 वर्ष तक रहकर श्रीराम के चरण पादुकाओं का आश्रय लेकर अयोध्या जी का राज्य किया
तुलजापुर में सती माँ ने श्रीराम की परीक्षा लेने के बाद श्रीराम को सीतान्वेषण में सफल होने का वरदान दिया
चित्रकूट कामदगिरि से लगभग 4-5 कि.मी. दूर गहरे जंगल में मंदाकिनी की धारा में एक विशाल सफेद शिला है। यहीं
अंकई किला की पहाड़ी की चोटी पर एक विशाल गुफा में अगस्त्यजी तथा श्रीराम, लक्ष्मण, जानकी का मंदिर है। पास
वाल्मीकि आश्रम सीता अभ्यारण्य सिहावा से दक्षिण दिशा में सीता नदी को चित्रोत्पला नदी कहते हैं। यहीं वाल्मीकि ऋषि का
श्रृंगवेरपुर सिंगरोर-(गंगाजी) कभी निशादराज गुह की राजधानी थी। इसका वर्तमान नाम सिंगरोर है तथा इलाहाबाद से लगभग 20 कि.मी. उत्तर
श्रीराम की बारात का तीसरा विश्राम स्थल श्रीराम जानकी मार्ग पर डेरवा गाँव है। चूँकि बारात ने यहाँ डेरा डाला