भारतवर्ष में श्रीराम / ShriRam in Bharatvarsh

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वनवास काल में श्रीराम सरगुजा के जंगलों में लम्बी अवधि तक रहे हैं। उनकी यात्रा की स्मृति में अन्य अवशेषों
माना जाता है कि इसी अरण्य में भगवान शिव के डमरू से वेदों का उद्घोष हुआ था। इस नाते इस
यज्ञ स्थल से श्रृंगी आश्रमः- मखौड़ा-महबूबगंज-शेरवाघाट 22 कि. मी
महाराष्ट्र के नासिक जिले में एक क्षेत्र विशेष में ठाण नाम के कई गाँव हैं। इसके पीछे लोक मान्यता ये
रामनाथ मंदिर यह मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। श्रीराम ने इसकी स्थापना की थी। मंदिर
सिद्धा पहाड़ ऋषियों की अस्थियों के ढेर से बना है। इसमें रंग-बिरंगी बजरी निकलती है। यहीं श्रीराम ने भूमि को
जब श्रीराम कावेरी की शाखा के किनारे चलते हुए यहाँ पहुँचे तो ऋषियों ने उन्हें वहीं रहने को कहा। श्रीराम
विश्वामित्र जी का आश्रम तपोवन में था। इसे सिद्धाश्रम भी कहते हैं। किन्तु अब कोई स्थान विशेष आश्रम के नाम
दशरथ कुण्ड लोरी लोक मान्यता के अनुसार ‘लोरी‘ के निकट पहुँचकर श्रीराम को दशरथ जी के स्वर्गवास का आभास हो
ऋषियन शब्द ऋषियों का अपभ्रंश है। रामायण काल में यहाँ ऋषि मंडल था। यहाँ पहुँचने के लिए शंकर गढ़, मऊ