भारतवर्ष में श्रीराम / ShriRam in Bharatvarsh

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समुद्र के किनारे एक छोटी पहाड़ी को गन्दमादन कहते हैं। पहाड़ी पर श्रीराम के चरण चिह्न बने हैं। यहाँ खडे़
यह रामलिंग (शिव मंदिर) रामेश्वरम की तरह ही बनाया गया है। यहाँ कुल 108 शिवलिंग स्थापित किये गये हैं। खर-दूषण
मोहनगंज नदी का वर्तमान नाम सकरनी नदी है। यह प्रतापगढ़ से पूर्व दिशा में लगभग 8 कि.मी. दूर है। ग्रंथ
स का मूल नाम त्रिशिरापल्ली है। यह रावण के भाई त्रिशिरा ने बसाई थी। श्रीराम की सेना इधर से ही
यह स्थान पूर्वी चम्पारन में मोतिहारी से लगभग 20 कि.मी. पूर्व दक्षिण कोण में है। माना जाता है कि श्रीराम
श्री राम मंदिर, मोटू कोंटा से 8 कि.मी. दक्षिण दिशा में है । मोटू के जंगल में श्रीराम, लक्ष्मणजी व
नासिक से 28 कि.मी. पश्चिम दिशा में गोदावरी के उद्गम स्थल के पास श्रीराम ने कुशों से दशरथ जी का श्राद्ध
रावण वध के कारण श्रीराम व सीता जी पर ब्रह्महत्या का पाप लगा हुआ था। श्रीराम ने सीता जी के
श्रीराम ने यहाँ नदियों के किनारे लम्बी यात्रा की थी तथा ऋषियों के आश्रम भी प्रायः नदियों के किनारे ही
वनवास काल में श्रीराम सरगुजा के जंगलों में लम्बी अवधि तक रहे हैं। उनकी यात्रा की स्मृति में अन्य अवशेषों