शरथ जी के स्वर्गवास के बाद राजकाज भरत जी के नियंत्रण में आया था। भरत जी को बालक समझ कर राजा जनक उनकी सहायता एवं मार्गदर्शन के लिए कुछ काल तक अयोध्या जी में रहे थे। क्योंकि पिता का पुत्री की ससुराल में रहना नैतिक नहीं माना जाता।
इसलिए राजा जनक ने कुछ भूमि अपने लिए खरीद कर एक बस्ती बसाई थी। आज भी इसे जनक औरा कहते हैं। यहां जनक जी का मंदिर है।
मानस 2/321/3,4