होसदुर्ग से 25 कि.मी. दूर रामगिरि नामक एक पहाड़ी है। श्रीराम ने लंका जाते समय भगवान शिव की पूजा की थी। इसलिए पहाड़ी का नाम रामगिरि तथा मंदिर का नाम रामेश्वर है।
Month: February 2020
अंतराष्ट्रीय धरोहर के रूप में ख्याति प्राप्त हम्पी त्रेतायुगीन महत्वपूर्ण स्थल है । हंपी से कुछ दूरी पर अवस्थित प्रस्रवण पर्वत और स्फटिक शिला रामायण काल से जुड़े तीर्थ हैं । स्फटिक शिला वह पावन पत्थर है जिस पर बैठकर राम जी ने वानर और भालुओं के साथ मिलकर लंका अभियान की शुरुआत की थी …
श्रीराम ने वर्षा के चार महीने प्रस्रवण चोटी पर बिताये थे तथा वहीं से सीताजी का पता पाकर लंका के लिए प्रस्थान किया था। हम्पी से 4 कि.मी. दूर माल्यवंत पर्वत की चोटी का नाम प्रस्रवण चोटी है। यहाँ एकमात्र विग्रह मिला है जहाँ श्रीराम ने धनुष धारण नहीं कर रखा।
हम्पी अनागुन्डी गाँव ही प्राचीन किष्किंधा है। यहाँ वाल्मीकि रामायण में वर्णित दृश्य मिलते हैं। अन्य महत्त्वपूर्ण स्थलों में यहाँ बाली का भंडार, अंजनी पर्वत, वीरूपाक्ष मंदिर,कोदण्डराम मंदिर, मतंग पहाड़ी दर्शनीय हैं। महत्त्वपूर्ण यह भी है कि राजवंश स्वयं को अंगद का वंशज मानता है
तुंगभद्रा नदी यहाँ धनुषाकार घुमाव लेती है। नदी के एक ओर बाली-सुग्रीव का युद्ध हुआ था तथा दूसरे किनारे पर वृक्षों की ओट से श्रीराम ने बाली को बाण मारा था। यहां श्रीराम के चरण चिह्न हैं।



