महाराष्ट्र के नासिक जिले में एक क्षेत्र विशेष में ठाण नाम के कई गाँव हैं। इसके पीछे लोक मान्यता ये है कि हिरण रूपी मारीच जंगल में पेड़ों और झाड़ियों के पीछे जान बचाने के लिये छिपता रहा । उसकी मृत्यु से पूर्व रामजी ने अनेक स्थानों पर खडे़ होकर निशाना साधा था किन्तु तीर …
Month: February 2020
द्धेश्वर प्रवरा संगम पर ये तीर्थ है । लोक विश्वास के अनुसार हरिण रूपी मारीच श्रीराम से डरकर यहाँ छुप गया था। शिव कृपा से श्रीराम को मारीच को ढूँढने में सिद्धता प्राप्त हुई थी। इसलिए यहाँ सिद्धेश्वर मंदिर की स्थापना हुई। गोस्वामी तुलसी दास जी ने मारीच वध का पूर्ण विवरण 3/26/6 से 3/27/1 …
दावरी के उद्गम स्थल गोमुख से कुछ आगे चलकर माँ गोदावरी पुनः लुप्त हो गयी थी। लोकमान्यता के अनुसार यहाँ श्रीराम ने बाण द्वारा पुनः माँ गोदावरी को प्रकट किया था। जिस स्थान पर बाण चलाया गया वहाँ अब ये जल एक कुण्ड के रूप विराजमान है । वा.रा. 3/16/2, 3 मानस 3/13/1 से 3/16/1 …
नासिक से 28 कि.मी. पश्चिम दिशा में गोदावरी के उद्गम स्थल के पास श्रीराम ने कुशों से दशरथ जी का श्राद्ध किया था। इसलिए इस क्षेत्र का नाम कुशावृत तीर्थ है। वा.रा. 3/16/6 मानस 3/13/1 से 3/16/1 तक
रामसेज पर्वत, नासिक से 16 कि.मी. दूर गुजरात मार्ग पेट रोड पर एक पहाड़ी पर श्री सीता रामजी के विश्राम स्थल की मान्यता है। यहाँ सीता रामजी के नाम पर दो कुण्ड भी हैं। आश्चर्यजनक बात यह है कि इस क्षेत्र में काँटे नहीं हैं तथा मखमली घास है।



