Month: February 2020

सीता सरोवर

पंचवटी से 4 कि.मी. उत्तर दिशा में म्हसरूल में दो सरोवर श्रीराम व सीता माँ के नाम पर हैं। दोनों इन सरोवरों में स्नान करते थे। 1975 के आपात् काल से पूर्व तक यहाँ विशाल मेले लगते रहे थे। गोस्वामी तुलसी दास ने मानस में 3/13/1 से 3/16/1 तक श्रीराम के पंचवटी प्रवास का वर्णन …

जन स्थान

नासिक में पंचवटी से 8-10 कि.मी. दूर गोदावरी तथा कपिला नदी के संगम पर श्री लक्ष्मण जी ने शूर्पणखां की नाक काटी थी। नासिका कर्तन् स्थल होने के कारण ही शहर का नाम नासिक है।

अगस्तेश्वर मंदिर

नासिक से 16 कि.मी. उत्तर दिशा में एक अति प्राचीन अगस्त्येश्वर आश्रम माना जाता है। अब यहाँ पिंपलेश्वर महादेव के नाम से एक मंदिर निर्माणाधीन है। प्राचीन मंदिर ध्वस्त हो चुका है। यहीं श्रीराम व अगस्त्य मुनि की भेंट हुई थी।

रामेश्वर पाटौदा

पंचवटी प्रवास के दौरान श्रीराम आस-पास के क्षेत्रों में भ्रमण करते रहे थे। तभी उन्होंने पाटौदा गाँव में रामेश्वर लिंग की स्थापना की थी। यहाँ स्थापित शिव लिंग में आज भी सर्वदा पानी रहता हैं। स्थानीय लोग इसे दवा (औषधि) के रूप में प्रयोग करते है। सम्भवतः यह अगस्त्य जी के भाई का आश्रम था।