श्रीराम, लक्ष्मण का विराध से लम्बा संघर्ष चला था और विराध वध में दोनों के हथियार तथा वस्त्र भी खून से सन गए थे। टिकरिया तथा मारकुंडी के बीच एक विशाल पुष्करणी में उन्होंने अपने हथियार तथा वस्त्र धोये थे। वा.रा. 3/4/5 से 12 परिस्थितिजन्य। पुष्करिणी से मारकण्डेय आश्रमः- टिकरिया-जमुनिहाई-मारकण्डेय आश्रम। 12 कि.मी
Month: February 2020
अमरावती से 3 कि.मी. दूर घनघोर जंगल में एक भयंकर कुण्ड है। इस कुण्ड में झांकने पर भी डर लगता है। यहाँ विराध दफनाया गया था। वा.रा. 3/2, 3, 4 पूरे अध्याय, मानस 3/6/3, 4
अत्रि आश्रम से 6-7 कि.मी. दूर जंगल में एक रमणीक स्थान अमरावती है। अमरावती श्रीराम के पूर्वज राजा अम्बरीश की तपस्थली है। श्रीराम ने यहाँ विश्राम किया था। इससे थोड़ी दूरी पर विराध ने श्रीराम पर आक्रमण किया था। वा.रा. 3/1, पूरे अध्याय, मानस 3/6/2 मार्गः- यहाँ से जंगल का मार्ग है। यहाँ मार्गदर्शक अनिवार्य …
यहां श्रीराम, मां सीता, अत्रि मुनि तथा मां अनसूया की अद्भुत भेंट हुई थी। माँ अनसूया की तपस्या से माँ गंगा मंदाकिनी के रूप में 100 धाराओं में यहाँ प्रकट हुई थी। आज भी यह दृश्य देखा जा सकता है। वा.रा. 2/117, 118, 119 पूरे अध्याय, मानस 3/2/2, से 3/6/1 अत्रि आश्रम से अमरावती आश्रमः- …
टाठी घाट चित्रकूट बुंदेलखंडी में टाठी का अर्थ है थाली अर्थात् गोल। यहाँ माँ मन्दाकिनी गोल आकार लेती हैं इसलिए नाम टाठीघाट है। यहाँ जंगल में विचित्र सिद्ध संतों के दर्शन होते हैं। चित्रकूट से अत्रि आश्रम के लिए मंदाकिनी के किनारे-किनारे एक पुराना मार्ग अब भी है। वा.रा. 2/117/1 से 8 तथा 20, मानस …



