इलाहाबाद में एक टीले पर यह आश्रम स्थित है। पहले गंगा माँ की धारा यहाँ से होकर बहती थी। श्रीराम भरद्वाज मिलन इसी स्थान पर हुआ था। ग्रंथ उल्लेख वा.रा. 2/54/5 से 43 2/55/1 से 11, मानस 2/105/4 से 2/108 दोहा।
Month: February 2020
तीर्थराज प्रयाग की महिमा अनन्त मानी गयी है । सभी युगों में तीर्थराज विद्यमान रहते हैं । त्रेतायुग में श्रीराम ने स्वयं श्रीमुख से तीर्थराज प्रयाग (संगम) की प्रशंसा की है। यहाँ भारत वर्ष की तीन पावन नदियों गंगा, यमुना तथा सरस्वती का संगम है। वा.रा. 2/54/2, 6, 8, मानस 2/104/1 से 2/105/3
श्रीराम ने इलाहाबाद से लगभग 15 कि. मी. उत्तर पश्चिम में चरवा गाँव में स्थित तालाब में स्नान किया था तथा रात्रि विश्राम किया था। ग्रंथ उल्लेख वा.रा. 2/52/102,103 2/53/1 से 35 तक पूरा अध्याय, मानस 2/104/1
श्रृंगवेरपुर में गंगा नदी पार करते समय सीता माँ गंगा पार से एक मुट्ठी रेती लायीं थीं। उस रेती की कूरी कर उन्होंने भगवान शिव की पूजा की थीं। बाद में यहाँ शिव मन्दिर की स्थापना हुई। ग्रंथ उल्लेख वा.रा. 2/52/92, 93, मानस 2/101/1 से 2/103/1 2/104 दोहा ।
हाँ केवट ने श्रीराम के चरण धोये थे उसके पश्चात शृंगवेरपुर से 2 कि.मी. दूर गंगाजी के किनारे सीता कुण्ड है। यहाँ से उन्होंने गंगा जी पार की थी तथा सुमंत्र को वापस अयोध्याजी भेजा था।वा.रा. 2/52/74 से 77, मानस 2/99/2 से 2/101 दोहे तकसीता कुण्ड से शिव मंदिर कुरईः- गाड़ी का मार्ग इलाहाबाद घूमकर …




