Month: February 2020

वेदी वन पूर्वी चंपारण

मिथिला में लोक परम्परा के अनुसार विवाह के चैथे दिन वेदी बना कर पुनः विवाह की परम्परा है। आज भी इसे चैथाड़ी कहा जाता है। चैथाड़ी के बाद ही विवाह संस्कार पूर्ण माना जाता है। यहां चैथाड़ी की वेदी बनी थी। इसलिए गांव का नाम भी वेदी वन है। निकटवर्ती गांवों के नाम भी इस …

सीता कुण्ड वेदीवन पूर्वी चंपारण

यह स्थान पूर्वी चम्पारन में मोतिहारी से लगभग 20 कि.मी. पूर्व दक्षिण कोण में है। माना जाता है कि श्रीराम की बारात ने यहाँ रात्रि विश्राम किया था। यहाँ कुण्ड में सीता माँ का कंगन खुला था। इस कुण्ड में पानी नीचे से ही आता है तथा कभी सूखता नहीं। पास ही भूमि में एक …

पंथ पाकड़ सीतामढ़ी

जनकपुर से प्रस्थान कर श्री राम की बारात ने प्रथम रात्रि विश्राम पंथ पाकड़ में किया था। माना जाता है कि माँ सीता ने दातुन करके जो फेंक दी थी उसी से इस पाकड़ का जन्म हुआ है। यहाँ से बारात सीता मढ़ी होती हुई सीता कुण्ड पहुची थी सीता मढ़ी का विवरण इस प्रकार …

विहार कुण्ड जनकपुर

विवाह के पश्चात् चारों दुल्हा, दुल्हिन यहां आमोद-प्रमोद के लिए आये थे। चारों ने यहां जल-क्रीड़ा की थी इसलिए आज भी इस कुण्ड का नाम विहार कुण्ड है। वा.रा. 1/70, 71, 72, 73 पूरे अध्याय, मानस 1/212/4,1/286/3 से 1/288/2, 3, 4, 1/313/3, 1/319 छंद 1/321/छन्द, 1/322/4 से 1/324/छ-4

रत्न सागर जनकपुर

लोक मान्यता के अनुसार राजा जनक ने चारों दामादों, बेटियों तथा समधी जी राजा दशरथ जी को दहेज में असीम धन, रत्नादि दिये थे। आज की ही भाँति तब भी दहेज दिखाया जाता था। यहां दहेज अवलोकनार्थ रखा गया था। तब यह सागर रत्नों से भर गया था इसलिए आज भी इसे रत्न सागर कहा जाता …