सीताजी का हरण कर ले जा रहे रावण का जटायु से युद्ध हुआ था। श्रीराम ने उनका अग्नि संस्कार किया तथा जलांजलि दी। नासिक से 58 कि.मी. घोटी के पास ताकेद गाँव में सर्वतीर्थ वही पवित्र स्थल है। वा.रा. 3/49/37 से 40/3/50, 51 पूरे अध्याय 3/52/1 से 13/3/64/35 से 77/3/65/1 से 9/3/67/9 से 3/69/1, मानस 3/28/4 …
श्रीराम ने मारीच वध के पश्चात् यहाँ मारीच को संसार रूपी भवसागर से मुक्ति प्रदान की थी। वा.रा. 3/44/1 से 3/44/22 तक मानस 3/26/6 से 3/27/1 तक।
मारीच को मारने के पश्चात् श्रीराम ने गोदावरी तथा प्रवरा के पवित्र संगम पर घट स्थापित कर शिव पूजा की थी।
गोदावरी के किनारे गंगापुर तालुका में श्रीराम द्वारा स्थापित भगवान शिव का रामेश्वर मंदिर है। लोकमान्यता के अनुसार श्रीराम के बाण से मृत मारीच का धड़ (काया) यहाँ गिरा था। वा.रा. 3/44/1 से 3/44/22 तक मानस 3/26/6 से 3/27/1 तक।
एक लोक कथा के अनुसार जब श्रीराम ने मारीच को बाण मारा तो उसके टुकड़े-टुकडे़ हो गये। उसका धड़ काय गांव में गिरा और सिर टोक गाँव में गिरा। मराठी में टोक अर्थात् मुण्डी। यहाँ भी श्रीराम द्वारा स्थापित शिव मंदिर है। वा.रा. 3/44/1 से 3/44/22 तक बाणेश्वर नांदूर मानस 3/26/6 से 3/27/1 तक।




