भारतवर्ष में श्रीराम / ShriRam in Bharatvarsh

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चित्रकूट कामदगिरि से लगभग 4-5 कि.मी. दूर गहरे जंगल में मंदाकिनी की धारा में एक विशाल सफेद शिला है। यहीं
टेक अर्थात् प्रतिज्ञा। श्रीराम ने यहाँ राक्षसों के वध की प्रतिज्ञा की थी। दूसरा अर्थ है टिकना। अर्थात् श्रीराम यहाँ
अत्रि आश्रम से 6-7 कि.मी. दूर जंगल में एक रमणीक स्थान अमरावती है। अमरावती श्रीराम के पूर्वज राजा अम्बरीश की
बुलढाणा जिले के सिंदखेड राजा में एक अत्यन्त प्राचीन शिव मंदिर है। इसकी स्थापना श्रीराम ने की थी। पास ही
ये है भैरव मंदिर तीर्थ । यह तीर्थ उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ जिले में सरयू नदी के तट पर महाराजगंज
सिद्धा पहाड़ से 6 कि.मी. दूर सुतीक्ष्ण मुनि का आश्रम है। जैतवारा स्टेशन से एक पक्की सड़क यहां तक आती
यहाँ श्रीराम ने शिव मंदिर की स्थापना की थी।
सीतामढ़ी रापा एक सीधी पंक्ति में यह तीसरी सीतामढ़ी है। जनकपुर से 16 कि.मी. दूर पूर्व दिशा में रापा नदी
टाठी घाट चित्रकूट बुंदेलखंडी में टाठी का अर्थ है थाली अर्थात् गोल। यहाँ माँ मन्दाकिनी गोल आकार लेती हैं इसलिए
परेव पड़ाव का अपभ्रंश है। माना जाता है कि श्री राम लक्ष्मण जी तथा विश्वामित्र जी ने यहां पड़ाव डाला