भारतवर्ष में श्रीराम / ShriRam in Bharatvarsh

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सतना में अवस्थित रक्सेलवा गांव का नाम राकस यानि राक्षस के अपभ्रंश से बना है। यहां पर रामजी ने बड़ी
जानकी मंदिर के पास एक विशाल मैदान है। लोक मान्यता के अनुसार इसी मैदान में देश विदेश के बलशाली राजाओं
चित्रकूट साधकों की तप स्थली है। यहां कोटि मुनि तपस्यारत थे। वनवास काल में श्रीराम उनके दर्शनार्थ यहां आये थे।
महाराष्ट्र के नासिक जिले में एक क्षेत्र विशेष में ठाण नाम के कई गाँव हैं। इसके पीछे लोक मान्यता ये
रामकुण्ड अयोध्या जी में विमान जहाँ उतरा वहाँ पुष्पक विमान की स्मृति में पुष्पकपुरी बसाई गयी थी। कालान्तर में उसी
वानर सेना ने मेलुकोटे नामक स्थान पर जलपान किया था। नगर से 3 कि.मी. दूर जंगल में एक पहाड़ी पर
नन्दी ग्राम में भरत जी तपस्या करते हुए श्रीराम के वापस अयोध्या आने की प्रतीक्षा कर रहे थे। इसी समय
वाल्मीकि रामायण के अनुसार जनकपुर पहुंच कर मुनि विश्वामित्र, रामजी और भैया लखनलाल ने जनकजी के उपवन में डेरा डाला
मारीच ने बाण लगने के बाद श्रीराम की आवाज की नकल करते हुए लक्ष्मणजी से सहायता की गुहार की थी।
रामलिंग येडसी श्रीराम किसी भी स्थिति में भगवान शिव की पूजा अवश्य करते थे। उस्मानाबाद जिले में येडसी के निकट