घूरपुर तथा जसरा बाजार से पूर्व दिशा में यमुनाजी के किनारे भगवान शिव के एक प्राचीन मंदिर के निकट ही अत्यन्त प्राचीन गुफा है। एक छोटी सी पहाड़ी पर बनी इस गुफा में पहाड़ी पर खोद कर चित्र बनाये गये हैं। स्थानीय लोग इसे सीता रसोई कहते हैं। ग्रंथ उल्लेख वा.रा. 2/55/23 से 33, मानस …
श्री सीता राम जी ने यहाँ यमुना के तट पर रात्रि विश्राम किया था। वा.रा. 2/55/23 यमुनाघाट जलालपुर से सीता रसोईः- सिमरी – दरवारी – कचहरी – राष्ट्रीय राजमार्ग 76-शंकरगढ़-गंभीरपुर-उमापुर-जसरा-गौहनिया – घूरपुर – मनकुआर। राष्ट्रीय राजमार्ग 76 से 44 कि.मी.।नोट: यात्री को चाहिए कि जलालपुर घाट पर अपना वाहन छोडकर नाव से यमुनाजी पार कर …
माँ सीता ने अक्षयवट की पूजा व परिक्रमा की थी। अक्षय का अर्थ है जिसका क्षय (नाश) नहीं होता। ग्रंथ उल्लेख मानस 2/104/4 आगे का मार्ग अक्षयवट से यमुना घाट जलालपुरः- इलाहाबाद-किला-एम.जी.रोड- जलालपुर राष्ट्रीय राजमार्ग 2 से 12 कि.मी.
इलाहाबाद में एक टीले पर यह आश्रम स्थित है। पहले गंगा माँ की धारा यहाँ से होकर बहती थी। श्रीराम भरद्वाज मिलन इसी स्थान पर हुआ था। ग्रंथ उल्लेख वा.रा. 2/54/5 से 43 2/55/1 से 11, मानस 2/105/4 से 2/108 दोहा।
तीर्थराज प्रयाग की महिमा अनन्त मानी गयी है । सभी युगों में तीर्थराज विद्यमान रहते हैं । त्रेतायुग में श्रीराम ने स्वयं श्रीमुख से तीर्थराज प्रयाग (संगम) की प्रशंसा की है। यहाँ भारत वर्ष की तीन पावन नदियों गंगा, यमुना तथा सरस्वती का संगम है। वा.रा. 2/54/2, 6, 8, मानस 2/104/1 से 2/105/3



