श्रीराम मंदिर राम कलेवातारा नदी का वर्तमान नाम बकुलाही है। नदी में कंकड़ रेती बहुत होती थी इसलिए नाम बालुकिनी था। प्रतापगढ़ से दक्षिण में लगभग 15-20 कि.मी. दूर यह स्थल मिलता है। स्थान का नाम राम कलेवातारा है। वा.रा. 2/125/26 बालुकिनी नदी से श्रंगवेर पुरः- बेधन गोपालपुर-बालुकापुरा – आनापुर सागर – आनापुर – भगवानपुर …
देवघाट प्रतापगढ़ स्यंदिका का वर्तमान नाम सई है। जहाँ से श्रीराम ने नदी पार की वह स्थान प्रतापगढ़ से 12 कि.मी. दूर देव घाट के नाम से प्रसिद्ध है। ग्रंथ उल्लेखवा.रा. 2/49/12, मानस 2/188/1 2/321/3 आगे का मार्गस्यंदिका नदी से बालुकिनी नदीः- मोहनगंज-भुवलपुर-पन्डासी-अमरौना – सराय अनादेव – नौबस्ता- करमचन्द्रपुर-जेठवारा- भिटारा-बहादुर पुरी-तोड़ी का पूरा- बेधन गोपालपुर। …
मोहनगंज नदी का वर्तमान नाम सकरनी नदी है। यह प्रतापगढ़ से पूर्व दिशा में लगभग 8 कि.मी. दूर है। ग्रंथ उल्लेखवा.रा. 6/125/26 आगे का मार्गवद्रथी से स्यंदिकाः-वद्रथी नदी से यात्री देवघाट, मोहन गंज, स्यंदिका नदी, देवघाट पर आयें।
यहाँ गोमती नदी के किनारे महर्षि वालमीकि का आश्रम है। श्रीराम ने यहां से गोमती नदी पार की थी। सूल्तानपुर का पूर्व नाम श्रीराम जी के पुत्र कुश के नाम पर कभी कुशभानपुर बताया जाता है ग्रंथ उल्लेखवा.रा.2/49/11, मानस 2/187 4, 2 321/3 आगे का मार्गगोमती नदी से वद्रथीः- सुल्तानपुर-हुसैनगंज-खोखीपुर- मनियारी-कस्थुनी पूरव-मुसाफिरखाना- कंजास-सालपुर-जगदीशपुर-सरेसर -कामापुर-मोहनगंज। राष्ट्रीय …
वाल्मीकि रामायण में तमसा नदी से आगे चलने पर भगवान राम द्वारा अनेक नदियों के पार करने का विवरण मिलता है । इनमें वेदश्रुति नदी भी सम्मिलित है । वेदश्रुति नदी का वर्तमान नाम विसूही है । नदी पार करने के बाद माता जानकी ने जिस स्थान पर माता गिरिजा की विशेष पूजा अर्चना की …



