जनकपुर से प्रस्थान कर श्री राम की बारात ने प्रथम रात्रि विश्राम पंथ पाकड़ में किया था। माना जाता है कि माँ सीता ने दातुन करके जो फेंक दी थी उसी से इस पाकड़ का जन्म हुआ है। यहाँ से बारात सीता मढ़ी होती हुई सीता कुण्ड पहुची थी सीता मढ़ी का विवरण इस प्रकार …
विवाह के पश्चात् चारों दुल्हा, दुल्हिन यहां आमोद-प्रमोद के लिए आये थे। चारों ने यहां जल-क्रीड़ा की थी इसलिए आज भी इस कुण्ड का नाम विहार कुण्ड है। वा.रा. 1/70, 71, 72, 73 पूरे अध्याय, मानस 1/212/4,1/286/3 से 1/288/2, 3, 4, 1/313/3, 1/319 छंद 1/321/छन्द, 1/322/4 से 1/324/छ-4
लोक मान्यता के अनुसार राजा जनक ने चारों दामादों, बेटियों तथा समधी जी राजा दशरथ जी को दहेज में असीम धन, रत्नादि दिये थे। आज की ही भाँति तब भी दहेज दिखाया जाता था। यहां दहेज अवलोकनार्थ रखा गया था। तब यह सागर रत्नों से भर गया था इसलिए आज भी इसे रत्न सागर कहा जाता …
त्रेता युग में मिथिला नरेश सीरध्वज जनक के दरबार में रामजी द्वारा धनुर्भंग के बाद अयोध्याजी से बारात आई। श्री राम सहित चारों भाईयों का विवाह हुआ। जिस स्थान पर जनकपुर में मणियों से सुसज्जित वेदी और यज्ञ मंडप निर्मित हुआ वह समकाल में रानी बाजार के निकट है । यह स्थल मणि मण्डप के …
धनुषा नेपाल का प्रमुख जिला है । धनुषा नाम ऐतिहासिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। दरअसल ये भारतीय संस्कृति के उस संधिकाल का प्रतीक है जब विष्णु के एक अवतार परशुराम और उनके बाद के अवतार श्री राम का परस्पर मिलन हुआ था । धनुषा धाम में आज भी पिनाक धनुष के अवशेष पत्थर के …




