नासिक में पंचवटी से 8-10 कि.मी. दूर गोदावरी तथा कपिला नदी के संगम पर श्री लक्ष्मण जी ने शूर्पणखां की नाक काटी थी। नासिका कर्तन् स्थल होने के कारण ही शहर का नाम नासिक है।
नासिक गोदावरी के किनारे पाँच वट वृक्षों का स्थान है। लोक विश्वास के अनुसार यहीं से रावण ने सीता माँ का अपहरण किया था।
नासिक से 16 कि.मी. उत्तर दिशा में एक अति प्राचीन अगस्त्येश्वर आश्रम माना जाता है। अब यहाँ पिंपलेश्वर महादेव के नाम से एक मंदिर निर्माणाधीन है। प्राचीन मंदिर ध्वस्त हो चुका है। यहीं श्रीराम व अगस्त्य मुनि की भेंट हुई थी।
पंचवटी प्रवास के दौरान श्रीराम आस-पास के क्षेत्रों में भ्रमण करते रहे थे। तभी उन्होंने पाटौदा गाँव में रामेश्वर लिंग की स्थापना की थी। यहाँ स्थापित शिव लिंग में आज भी सर्वदा पानी रहता हैं। स्थानीय लोग इसे दवा (औषधि) के रूप में प्रयोग करते है। सम्भवतः यह अगस्त्य जी के भाई का आश्रम था।
अंकई किला की पहाड़ी की चोटी पर एक विशाल गुफा में अगस्त्यजी तथा श्रीराम, लक्ष्मण, जानकी का मंदिर है। पास ही 6 तालाब हैं, जिनमें स्वच्छ जल, सदा भरा रहता है। श्रीराम के वनवास काल में यहा आने की लोक कथा प्रचलित है।




