जालना जिले में शेवली के निकट श्रीराम ने किसानों को हल चलाना सिखाया था तथा शिव पूजा की थी। आज भी यहाँ के किसान शिव मंदिर में पूजा करते हैं तथा हल व लीक की पूजा की जाती है।
बुलढाणा जिले के सिंदखेड राजा में एक अत्यन्त प्राचीन शिव मंदिर है। इसकी स्थापना श्रीराम ने की थी। पास ही जंगल में सीता नहानी है।
श्रीराम को पंचाप्सर सरोवर में संगीत की ध्वनि सुनायी दी थी। यहाँ मण्डकरणी ऋषि 5 अप्सराओं के साथ जल में रहते थे। बुलढाणा जिले में लोणार में स्थित यह विश्व का अद्भुत स्थल है। सीता नहानी, राम (गया) कुण्ड, पाँच अप्सराओं के मंदिर सभी की कहानी श्रीराम वनवास से जुड़ी है।
श्रीराम एवं भोले बाबा परस्पर पूजा करते थे। दोनों ही एक दूसरे के आराध्य हैं। सामान्य परम्परा के विरुद्ध यहाँ भगवान शिव की जलहरी, पूर्व दिशा में है। माना जाता है कि आते हुए अपने आराध्य श्रीराम के दर्शनार्थ भगवान शिव ने अपनी स्थिति बदल ली थी। अर्थात् वे मुड़कर श्रीराम को देखने लगे थे। …
रामेश्वर माहुर अत्रि आश्रम जमदग्नि आश्रम तथा दत्तात्रेय आश्रमों में भ्रमण के पश्चात् श्रीराम ने एक दिन यहां विश्राम किया तथा यहां उन्होंने भगवान शिव की पूजा की थी। उनकी स्मृति में आज भी यहां शिव मंदिर स्थापित है।



