श्रीराम ने जिमीकुंटा, मंडल में इलेन्दा के फलों से दशरथ जी का श्राद्ध किया था। आज भी लोग नया कार्य आरम्भ करने तथा पूर्वजों का श्राद्ध करने यहाँ आते हैं।
भद्राचलम से 35 कि.मी. पश्चिम दिशा में गोदावरी के किनारे पर्णशाला है। श्रीराम ने यहाँ कुछ दिन निवास किया था।
श्री सुन्दर सीता राम मंदिर कोंटा से 40 कि.मी. दूर शबरी तथा गोदावरी का पवित्र संगम है। पास ही लगभग 2 कि.मी. दूर श्री सुन्दर सीता राम स्वामी देव स्थानम है। यहाँ श्रीराम कुछ काल तक रहे हैं तथा यहां तक शबरी नदी के किनारे-किनारे आए थे।
तेलंगाना के कोनावरम में शबरी, गोदावरी नदी का पावन संगम स्थल है । – यहां तक श्रीराम मां शबरी के किनारे-किनारे आते हैं। यहां आकर वे शबरी तथा गोदावरी के पावन संगम में स्नान करते हैं । यह संगम विशाल क्षेत्र में फैला है तथा वर्षा काल में सम्पूर्ण क्षेत्र जलमग्न हो जाता है।
सलेरू संगम मोटू मोटू से 2 कि.मी. दूर सलेरू तथा शबरी नदी का पवित्र संगम है। माना जाता है कि श्री सीता जी ने यहाँ स्नान किया था। यहाँ तक श्रीराम शबरी नदी के किनारे-किनारे आए थे।


