Hindi Ki Bindi

अत्रि आश्रम

यहां श्रीराम, मां सीता, अत्रि मुनि तथा मां अनसूया की अद्भुत भेंट हुई थी। माँ अनसूया की तपस्या से माँ गंगा मंदाकिनी के रूप में 100 धाराओं में यहाँ प्रकट हुई थी। आज भी यह दृश्य देखा जा सकता है। वा.रा. 2/117, 118, 119 पूरे अध्याय, मानस 3/2/2, से 3/6/1 अत्रि आश्रम से अमरावती आश्रमः-  …

टाठी घाट

टाठी घाट चित्रकूट बुंदेलखंडी में टाठी का अर्थ है थाली अर्थात् गोल। यहाँ माँ मन्दाकिनी गोल आकार लेती हैं इसलिए नाम टाठीघाट है। यहाँ जंगल में विचित्र सिद्ध संतों के दर्शन होते हैं। चित्रकूट से अत्रि आश्रम के लिए मंदाकिनी के किनारे-किनारे एक पुराना मार्ग अब भी है।  वा.रा. 2/117/1 से 8 तथा 20, मानस …

गुप्त गोदावरी

चित्रकूट भयंकर जंगल में प्रकृति की अनुपम देन है गुप्त गोदावरी, सीता माँ यहाँ स्नान करती थीं। यहीं मयंक नामक चोर ने उनके वस्त्राभूषण चुराये थे तथा लक्ष्मणजी ने उसे सजा दी थी। मानस 2/248/3 2/307/2

स्फटिक शिला

चित्रकूट कामदगिरि से लगभग 4-5 कि.मी. दूर गहरे जंगल में मंदाकिनी की धारा में एक विशाल सफेद शिला है। यहीं इन्द्र पुत्र जयंत ने कौवे के रूप में सीता माँ पर चंचु प्रहार किया था। मानस 3/0/2 से 3/2 दोहा तक।वा.रा. 5/38/12 से 35 तक।

भरत कूप

भरतजी श्रीराम के राज्याभिषेक के लिए सभी तीर्थों का जल लाये थे। वह पवित्र जल अत्रि मुनि के परामर्श से भरतकूप में स्थापित किया था। भरतकूप कर्वी से 18 कि.मी. है। मानस 2/307/2, 4 2/309 दोहा से 2/310 दोहा तक, मानस 2/311/1, 2, 3,  2/312 दोहा।