इसका वर्तमान नाम मंडफा है जो माण्डव्य का अपभ्र्रंश है। पहाड़ी का नाम भी मंडफा है। यहाँ भरत जी की बहुत मान्यता है।वा.रा. 2/116/1 से 26, मानस 2/134 दोहा 2/307/2 2/311/3 2/312 दोहा।
यह चित्रकूट का बहुत ही प्रसिद्ध स्थल है। पास ही यज्ञवेदी मंदिर है। कुछ विद्वानों का मत है कि, यही वह स्थान विशेष है जहां वनवास काल में श्री सीता राम जी रहते थे। यह भी विश्वास किया जाता है, हनुमान जी की कृपा से गोस्वामी तुलसीदास जी को यहां श्री राम लक्ष्मण जी के …
यहां इन्द्रपुत्र जयंत की पत्नी ने तपस्या की थी। वनवास काल में श्रीराम के दर्शनार्थ देव कन्याएँ यहां एकत्रित हुई थीं। आज भी यहां तपस्वी साधना करते हैं। वा.रा. 2/116/1 से 26, मानस 2/134 दोहा, 2/307/2, 2/311/3, 2/312 दोहा
चित्रकूट साधकों की तप स्थली है। यहां कोटि मुनि तपस्यारत थे। वनवास काल में श्रीराम उनके दर्शनार्थ यहां आये थे। आज भी यहां अनेक संत तपस्यारत हैं। वा.रा. 2/116/1 से 26, मानस 2/134 दोहा, 2/307/2, 2/311/3, 2/312 दोहा।
वनवास काल में चित्रकूट में श्री सीताराम जी अनेक स्थलों पर लीला करते थे तथा प्रकृति का आनन्द लेते हुए निकटवर्ती क्षेत्रों में विहार करते थे। इसी क्रम में कभी-कभी यहां रात्रि विश्राम करते थे। आज भी शिला पर श्री सीता राम जी के विश्राम के चिन्ह हैं। दोनों के बीच धनुष रखने का चिन्ह …


