भरत कुण्ड नन्दीग्राम

नन्दीग्राम में भरतजी ने 14 वर्ष तक रहकर श्रीराम के चरण पादुकाओं का आश्रय लेकर अयोध्या जी का राज्य किया था। अयोध्या जी से लगभग 10 कि.मी. दूर यहीं श्रीराम तथा भरतजी का भावुक मिलन हुआ था। वा.रा. 2/112/ 23, 24, 25, 29, 6/127/36 से 54 मानस 2/315/2, 3, 2,/323/1, 2, 7/0/ दोहा से 7/2 …

हनुमान भरत मिलन मंदिर नन्दी ग्राम

नन्दी ग्राम में भरत जी तपस्या करते हुए श्रीराम के वापस अयोध्या आने की प्रतीक्षा कर रहे थे। इसी समय श्रीराम ने हनुमान जी को अपने समाचार देकर भरत जी से मिलने भेजा था। इस स्थल पर हनुमान जी व भरत जी की भावुक भेंट हुई थी। वा.रा. 6/125/36 से 46, 6/126 पूरा अध्याय मानस …

रामकुण्ड पुहपी

रामकुण्ड अयोध्या जी में विमान जहाँ उतरा वहाँ पुष्पक विमान की स्मृति में पुष्पकपुरी बसाई गयी थी। कालान्तर में उसी का अपभ्रंश हो गया पुहपी। पुहपी गाँव के पास ही रामकुण्ड नामक एक विशाल सरोवर श्रीराम के यहाँ पदार्पण का आज भी स्मरण कराता है। व.रा. 6/127/30 से 35 मानस 7/4क दोहा

भादर्शा अयोध्या जी नन्दी ग्राम

अयोध्या जी नन्दी ग्राम के पास भादर्शा नामक एक  बाजार है। भादर्शा का अर्थ है-भये दर्शन। अयोध्यावासियों को श्रीराम के पुष्पक विमान में दर्शन हुए थे। वा.रा. 6/127/30 से 39, मानस 7/4 दोहा 7/4 ख दोहा।

क्रतीर्थ अनागुंडी

तुंगभद्रा नदी यहाँ धनुषाकार घुमाव लेती है। इसे चक्रतीर्थ कहा जाता है। जब श्रीराम पुष्पक विमान से अयोध्या जा रहे थे तब मां सीता के आग्रह पर विमान यहां उतारा था। बाद में सुग्रीव ने यहां कोदण्ड राम मंदिर बनवाया था। वा.रा. 6/123/23 से 36 श्रीराम लंका से पुष्पक विमान द्वारा पहले किष्किंधा आये हंै, …