देवी पट्टनम स्थान पर श्रीराम ने शनिदेव को शांत करने के लिए नवग्रह की पूजा की थी। यहाँ, श्रीराम ने विष्णु चक्र की पूजा की थी तो उन्हें आर्शीवाद मिला कि वानर सेना को समुद्री लहरें परेशान नहीं करेंगी।
सूर्य के ताप तथा रोशनी से थके श्री राम और लक्ष्मण ने यहाँ स्नान किया और गणेश देव की पूजा की। श्री गणेश ने यहां भावी युद्ध में विजय का आशीर्वाद दिया।
मुत्तुकुड़ा से 10 कि.मी. दक्षिण दिशा में तीरताण्ड धाणम में ऋषि अगस्त्य के आदेश पर श्रीराम ने शिव पूजा की थी। मंदिर में श्रीराम, लक्ष्मण, राजा सेतुपति, ऋषि अगस्त्य तथा भगवान शिव की बहुत सुन्दर चित्रावली हैं। एक कि.मी. दूर रामरपाद मिलें हैं।
तमिल में कल्याण का अर्थ है विवाह। एक कथा के अनुसार मिमिसाइल में यहाँ के ऋषियों ने श्रीराम से माँग की थी कि वे विवाह का दृश्य देखना चाहते थे। इस मंदिर में श्रीसीतारामजी के विवाह के दृश्य हैं।

