जब श्रीराम कावेरी की शाखा के किनारे चलते हुए यहाँ पहुँचे तो ऋषियों ने उन्हें वहीं रहने को कहा। श्रीराम ने उन्हें अपना एक विग्रह देकर ऋषियों से आगे जाने कीअनुमति प्राप्त की और लंका की ओर चले गये।
यह रामलिंग (शिव मंदिर) रामेश्वरम की तरह ही बनाया गया है। यहाँ कुल 108 शिवलिंग स्थापित किये गये हैं। खर-दूषण तथा त्रिशिरा की ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति के लिए श्रीराम ने यहाँ शिव पूजा की थी।
स का मूल नाम त्रिशिरापल्ली है। यह रावण के भाई त्रिशिरा ने बसाई थी। श्रीराम की सेना इधर से ही रामेश्वरम गयी थी।
लोक कथा के अनुसार श्रीराम जब लंका से अयोध्या वापिस जा रहे थे तो स्थानीय नागरिकों ने यहाँ उनका पट्टाभिषेक किया था। किन्तु यह तर्कसंगत नहीं लगता। विद्वानों की राय में श्रीराम लंका अभियान में ही यहाँ से गये थे। यह स्थल जाने के मार्ग पर ही आता है।
लंका पर चढ़ाई करते समय श्रीराम ने गावी दैत्य का वध किया था। फिर उन्होंने शिव पूजा की तथा राजा दशरथजी का श्राद्ध किया था। सत्यगाला से 3 कि.मी. दूर प्र्रेत पर्वत पर भगवान शिव मंदिर पर आज भी स्थानीय लोग अपने पूर्वजों का श्राद्ध करने आते हैं।




