एक लोक कथा के अनुसार स्थानीय प्रभाव से यहाँ लक्ष्मणजी का मन राम भक्ति से हट गया था। राम देवर गुड्डा (राम देव पहाड़ी) के निकट जंगल में भगवान शिव का मंदिर है।
रामेश्वर से लंका जाते समय श्रीराम आये थे। यहाँ उन्होंने दशरथजी का श्राद्ध किया था।
चित्रदुर्ग जिले में होसदुर्ग से 11 कि.मी. दूर जंगल मेें हाल रामेश्वर में श्रीराम ने शिव पूजा की थी। श्रीराम के ईश्वर अर्थात् रामेश्वर नाम है।
होसदुर्ग से 25 कि.मी. दूर रामगिरि नामक एक पहाड़ी है। श्रीराम ने लंका जाते समय भगवान शिव की पूजा की थी। इसलिए पहाड़ी का नाम रामगिरि तथा मंदिर का नाम रामेश्वर है।
अंतराष्ट्रीय धरोहर के रूप में ख्याति प्राप्त हम्पी त्रेतायुगीन महत्वपूर्ण स्थल है । हंपी से कुछ दूरी पर अवस्थित प्रस्रवण पर्वत और स्फटिक शिला रामायण काल से जुड़े तीर्थ हैं । स्फटिक शिला वह पावन पत्थर है जिस पर बैठकर राम जी ने वानर और भालुओं के साथ मिलकर लंका अभियान की शुरुआत की थी …

