तुलजापुर में सती माँ ने श्रीराम की परीक्षा लेने के बाद श्रीराम को सीतान्वेषण में सफल होने का वरदान दिया तभी नाम श्रीराम वरदायिनी हुआ है।
रामलिंग येडसी श्रीराम किसी भी स्थिति में भगवान शिव की पूजा अवश्य करते थे। उस्मानाबाद जिले में येडसी के निकट घने जंगल में उन्होंने शिवलिंग की स्थापना की थी। इसीलिए इस मंदिर का नाम रामलिंग है।
येडेष्वरी एरमला सती माँ ने श्रीराम की परीक्षा लेते समय काफी लम्बी दूरी तक उनके आगे-आगे यात्रा की थी तभी श्रीराम ने सती माँ को ‘येडई माँ’ कहकर पुकारा था। एरमला में इसी नाम से उनका मंदिर है। यहाँ श्रीराम और सती माँ की भेंट हुई थी।
दण्डकारण्य में घूमते हुए श्रीराम ने यहाँ जैन मुनि देशभूषण तथा मुनि कुलभूषण की एक राक्षस से रक्षा की थी तभी उन्होंने यहाँ एक जिनालय की स्थापना की थी।
भूम से 13 कि.मी. दूर रामकुण्ड नामक गाँव है। माना जाता है कि यहाँ श्रीराम ने स्नान किया था। संभवतः यहाँ श्रीराम दो बार आये हैं।



