रामेश्वर सौताड़ा

लोक कथा के अनुसार श्रीराम यहाँ ऋषि पंडित आचार्य से मिलने आये थे। ऋषि संस्कृत विद्यालय चलाते थे। यहाँ श्रीराम ने शिव पूजा की थी  इसीलिए मंदिर का नाम रामेश्वर है।

रामलिंग देव स्थानम

लोक कथा के अनुसार श्रीराम ने लंका अभियान के समय घोड़ नदी के किनारे रूर नामक राक्षस का वध किया था। राक्षस का सिर यहाँ गिरा था इसलिए यह स्थल सिररूर था जो शिरूर हो गया है। यहां श्रीराम द्वारा स्थापित भगवान शिव का एक बहुत विशाल मंदिर है।

राम दरिया भाजा

राम दरिया राम द्वार का अपभ्रंश है। यहाँ पहाड़ की दो चोटियाँ इस प्रकार निकट हैं कि द्वार जैसा लगता है। माना जाता है कि श्रीराम इसी मार्ग से मुंबई से पूना की ओर गये थे।

बालुकेश्वर मंदिर, मालाबार

श्रीराम सीतान्वेषण करते हुए मुंबई में समुद्र तट तक आये थे। यहाँ उन्होंने बालू के शिवलिंग की स्थापना की थी तथा बाण से मीठे जल का स्रोत बनाया। वहीं आज बालुकेश्वर मंदिर है तथा मीठे जल का स्रोत अजस्र प्रवाहित हो रहा है। इसे बाण गंगा कहते हैं। वा.रा. 1/69/1 से 9 तक मानस 3/32/2

सर्वतीर्थ घोटी ताकेद नासिक

सीताजी का हरण कर ले जा रहे रावण का जटायु से युद्ध हुआ था। श्रीराम ने उनका अग्नि संस्कार किया तथा जलांजलि दी। नासिक से 58 कि.मी. घोटी के पास ताकेद गाँव में सर्वतीर्थ वही पवित्र स्थल है। वा.रा. 3/49/37 से 40/3/50, 51 पूरे अध्याय 3/52/1 से 13/3/64/35 से 77/3/65/1 से 9/3/67/9 से 3/69/1, मानस 3/28/4 …