रामकुण्ड त्र्यंबकेश्वर

दावरी के उद्गम स्थल गोमुख से कुछ आगे चलकर माँ गोदावरी पुनः लुप्त हो गयी थी। लोकमान्यता के अनुसार यहाँ श्रीराम ने बाण द्वारा पुनः माँ गोदावरी को प्रकट किया था। जिस स्थान पर बाण चलाया गया वहाँ अब ये जल एक कुण्ड के रूप विराजमान है । वा.रा. 3/16/2, 3 मानस 3/13/1 से 3/16/1 …

कुशावृत तीर्थ त्र्यम्बकेश्वर

नासिक से 28 कि.मी. पश्चिम दिशा में गोदावरी के उद्गम स्थल के पास श्रीराम ने कुशों से दशरथ जी का श्राद्ध किया था। इसलिए इस क्षेत्र का नाम कुशावृत तीर्थ है।  वा.रा. 3/16/6 मानस 3/13/1 से 3/16/1 तक

रामसेज पर्वत

रामसेज पर्वत, नासिक से 16 कि.मी. दूर गुजरात मार्ग पेट रोड पर एक पहाड़ी पर श्री सीता रामजी के विश्राम स्थल की मान्यता है। यहाँ सीता रामजी के नाम पर दो कुण्ड भी हैं। आश्चर्यजनक बात यह है कि इस क्षेत्र में काँटे नहीं हैं तथा मखमली घास है।

सीता सरोवर

पंचवटी से 4 कि.मी. उत्तर दिशा में म्हसरूल में दो सरोवर श्रीराम व सीता माँ के नाम पर हैं। दोनों इन सरोवरों में स्नान करते थे। 1975 के आपात् काल से पूर्व तक यहाँ विशाल मेले लगते रहे थे। गोस्वामी तुलसी दास ने मानस में 3/13/1 से 3/16/1 तक श्रीराम के पंचवटी प्रवास का वर्णन …

जन स्थान

नासिक में पंचवटी से 8-10 कि.मी. दूर गोदावरी तथा कपिला नदी के संगम पर श्री लक्ष्मण जी ने शूर्पणखां की नाक काटी थी। नासिका कर्तन् स्थल होने के कारण ही शहर का नाम नासिक है।