दशरथ समाधि

पिता की इच्छानुसार ही श्रीराम ने 14 वर्ष वन में बिताये थे। किन्तु पुत्र बिछोह में चक्रवर्ती सम्राट दशरथ जी ने प्राण त्याग दिये। श्रीराम की अनुपस्थिति में भरत जी ने यहाँ राजा दशरथ जी का अंतिम सँस्कार किया था। राज्यासीन होने के बाद श्रीराम यहाँ दर्शनार्थ आये थे। वा.रा. 2/76/14 से 23 मानस 2/168/1 …

जटा कुण्ड नन्दी ग्राम

राम ने पहले भरत तथा लक्ष्मण की जटाएँ साफ करवायीं तथा फिर अपनी जटाएँ साफ करवायीं तथा शोभा यात्रा के साथ अयोध्या जी में प्रवेश किया। नन्दी ग्राम के पास ही यह जटाकुण्ड स्थित है। वा.रा. 6/128/13, 14, 15, मानस 7/10/1 से 4

भरत कुण्ड नन्दीग्राम

नन्दीग्राम में भरतजी ने 14 वर्ष तक रहकर श्रीराम के चरण पादुकाओं का आश्रय लेकर अयोध्या जी का राज्य किया था। अयोध्या जी से लगभग 10 कि.मी. दूर यहीं श्रीराम तथा भरतजी का भावुक मिलन हुआ था। वा.रा. 2/112/ 23, 24, 25, 29, 6/127/36 से 54 मानस 2/315/2, 3, 2,/323/1, 2, 7/0/ दोहा से 7/2 …

हनुमान भरत मिलन मंदिर नन्दी ग्राम

नन्दी ग्राम में भरत जी तपस्या करते हुए श्रीराम के वापस अयोध्या आने की प्रतीक्षा कर रहे थे। इसी समय श्रीराम ने हनुमान जी को अपने समाचार देकर भरत जी से मिलने भेजा था। इस स्थल पर हनुमान जी व भरत जी की भावुक भेंट हुई थी। वा.रा. 6/125/36 से 46, 6/126 पूरा अध्याय मानस …

रामकुण्ड पुहपी

रामकुण्ड अयोध्या जी में विमान जहाँ उतरा वहाँ पुष्पक विमान की स्मृति में पुष्पकपुरी बसाई गयी थी। कालान्तर में उसी का अपभ्रंश हो गया पुहपी। पुहपी गाँव के पास ही रामकुण्ड नामक एक विशाल सरोवर श्रीराम के यहाँ पदार्पण का आज भी स्मरण कराता है। व.रा. 6/127/30 से 35 मानस 7/4क दोहा