अम्मा कुण्ड खैरपुट

खैरपुट बाली मेला और गोविन्द पल्ली मार्ग पर खैरपुट नामक गाँव से 4 कि.मी. दूर पहाड़ी पर प्राकृतिक कुण्ड है। यहाँ माँ स्नान करती थीं। सीता माँ द्वारा पालित मछलियाँ आज भी यहाँ मिलती हैं।

गुप्तेश्वर रामगिरी

रामगिरि जगदलपुर से 50 कि.मी. पूर्व दिशा में घनघोर जंगल में भगवान शिव एक अंधेरी गुफा में शयन कर रहे हैं। उड़ीसा, मध्य प्रदेश तथा आन्ध्र प्रदेश के हजारों वनवासी दर्शनार्थ आते हैं। निकट ही रामगिरि पर्वत पर श्रीराम के आने का पवित्र चिह्न माना जाता है।

कोटि महेश्वर

कोटिश्महेष्वर कोटुमसर कोटि महेश्वर का अपभ्रंश है कोटूमसर। जगदलपुर से 40 कि.मी. दूर दक्षिण दिशा में राष्ट्रीय उद्यान में एक अति सुन्दर गुफा है। यहाँ भगवान शिव जी के अनेकानेक लिंग प्रकृति ने निर्मित किये हैं। श्रीराम के वनवास काल में यहाँ आने की लोक कथा प्रचलित है।

सीताकुंड बस्तर

सीता कुण्ड तीरथ गढ़ जगदलपुर से 25 कि.मी. दूर कांगेर नदी के किनारे श्री सीता राम जी की लीला तथा शिव पूजा की कथा प्रसिद्ध है। यहाँ माँ सीता जी ने स्नान किया था।

शिव मंदिर चित्रकोट

इन्द्रावती नदी के बहुत ही मनमोहक जल प्रपात के पास एक गुफा में सीताजी तथा रामजी ने लीला की थी। श्रीराम ने यहाँ शिवलिंग की स्थापना की थी।