अंगिरा आश्रम घटुला नगरी से 20 कि.मी. दूर दक्षिण दिशा में घटुला गांव के पास पहाड़ की चोटी पर श्रीराम अंगिरा ऋषि से मिलने आये थे। ऊपर गुफा में ऋषि का विग्रह है।
शरभंग जी के और भी कई आश्रम मिले हैं। सभी स्थलों पर श्रीराम व शरभंग जी की भेंट नहीं हुई किन्तु श्रीराम यहाँ रहने वाले संतों के दर्शनार्थ यहाँ पधारे थे। आज भी यहाँ तपस्वी साधनारत हैं। यदि नगरी/सिहावा को केन्द्र मानें तो ये सभी आश्रम 25 कि.मी. के घेरे में आते हैं।
अगस्त्य आश्रम ऋषि मण्डल में सभी सात ऋषियों के आश्रम हैं। श्रीराम सभी आश्रमों के दर्शनार्थ गये थे। इसी क्रम में वे इस आश्रम में भी पधारे थे। संतों के आश्रम यहां आज भी हैं। यदि नगरी/सिहावा को केन्द्र मानें तो ये सभी आश्रम 25 कि.मी. के घेरे में आते हैं।
यह पूरा क्षेत्र ऋषि मण्डल रहा है। लोमश (राजीम) वाल्मीकि (तुरतुरिया) माण्डव्य (फिंगेश्वर) शृंगी (सिहावा) मुचकंुद (मैचका), शरभंग (दलदली), लोमश तथा शरभंग (डोंगरी) अंगीरा (घटुला) अगस्त्य (हर्दीभाटा/खारूगढ़) पुलस्त्य (दुधावा), कर्क/कंक (कांकेर डोगरी)। यदि नगरी/सिहावा को केन्द्र मानें तो ये सभी आश्रम 25 कि.मी. के घेरे में आते हैं।
श्रृंगी आश्रम के निकट ही यह आश्रम एक पहाड़ की चोटी पर है। साथ वाले पहाड़ पर माँ शांता की तपस्थली है। ऋषि आश्रम से शांता मंदिर तक पहाड़ के ऊपर-ऊपर ही मार्ग है। मां शांता का अब शीतला माता के रूप में पूजन किया जाता है।



