भारतवर्ष में श्रीराम / ShriRam in Bharatvarsh

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रामेश्वर से लंका जाते समय श्रीराम आये थे। यहाँ उन्होंने दशरथजी का श्राद्ध किया था।
सिद्धा पहाड़ ऋषियों की अस्थियों के ढेर से बना है। इसमें रंग-बिरंगी बजरी निकलती है। यहीं श्रीराम ने भूमि को
श्रीराम ने मारीच वध के पश्चात् यहाँ मारीच को संसार रूपी भवसागर से मुक्ति प्रदान की थी। वा.रा. 3/44/1 से
माना जाता है कि ताड़का वध के पश्चात् श्री राम के मन में स्त्रीवध के कारण ग्लानि थी क्योंकि उनके
जटा तीर्थ रामेश्वरम मंदिर से धनुषकोटि के मार्ग में जटातीर्थ है। यहाँ श्रीराम ने अपनी जटाएँ धोयी थीं। यहाँ स्नान
कोदण्ड का अर्थ है धनुष। समुद्र में एक प्राचीन मंदिर में श्रीराम, लक्ष्मण, हनुमान, सुग्रीव, जामवंत तथा विभीषण जी के
पुरवा चकिया तीर्थ उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जिले में तमसा नदी के तट से कुछ दूर गौराघाट के पास अवस्थित
बृहस्पति कुुण्ड देव गुरु बृहस्पति ने यहाँ यज्ञ किये तथा आश्रम की स्थापना की थी। बाद में आश्रम में ऋषियों