भारतवर्ष में श्रीराम / ShriRam in Bharatvarsh

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लेखा पत्थर रेंगले बगीचा से 10 कि.मी. पूर्व दिशा में श्री सीताराम जी ने रात्रि विश्राम किया था। ऊँची चट्टानों
चित्रदुर्ग जिले में होसदुर्ग से 11 कि.मी. दूर जंगल मेें हाल रामेश्वर में श्रीराम ने शिव पूजा की थी। श्रीराम
श्रीराम ने जिमीकुंटा, मंडल में इलेन्दा के फलों से दशरथ जी का श्राद्ध किया था। आज भी लोग नया कार्य
हाँ केवट ने श्रीराम के चरण धोये थे उसके पश्चात शृंगवेरपुर से 2 कि.मी. दूर गंगाजी के किनारे सीता कुण्ड
मोहनगंज नदी का वर्तमान नाम सकरनी नदी है। यह प्रतापगढ़ से पूर्व दिशा में लगभग 8 कि.मी. दूर है। ग्रंथ
यहां हनुमान जी ने स्नान किया था। वा.रा. 6/128/13,14,15 मानस 7/10/1 से 4 लंका से अयोध्या जी आते समय श्रीराम
सती माँ द्वारा परीक्षा लेने के बाद उनके संकेत पर श्रीराम दक्षिण दिशा में सिंडगी के उत्तर की ओर 20
एक लोक कथा के अनुसार जब श्रीराम ने मारीच को बाण मारा तो उसके टुकड़े-टुकडे़ हो गये। उसका धड़ काय
भक्त कामदगिरि को श्रीराम का प्रत्यक्ष शरीर मानते हैं। श्रीराम यहाँ बहुत दिनों तक रहे थे। हजारांे श्रद्धालु नित्यप्रति इसकी
यह रामलिंग (शिव मंदिर) रामेश्वरम की तरह ही बनाया गया है। यहाँ कुल 108 शिवलिंग स्थापित किये गये हैं। खर-दूषण