भारतवर्ष में श्रीराम / ShriRam in Bharatvarsh

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ऋषियन शब्द ऋषियों का अपभ्रंश है। रामायण काल में यहाँ ऋषि मंडल था। यहाँ पहुँचने के लिए शंकर गढ़, मऊ
माना जाता है कि वनवास काल में सीताराम जी ने यहाँ से नदी पार की थी। यहाँ शिवनाथ व महानदी
इसका वर्तमान नाम मंडफा है जो माण्डव्य का अपभ्र्रंश है। पहाड़ी का नाम भी मंडफा है। यहाँ भरत जी की
माना जाता है कि ताड़का वध के पश्चात् श्री राम के मन में स्त्रीवध के कारण ग्लानि थी क्योंकि उनके
नन्दीग्राम में भरतजी ने 14 वर्ष तक रहकर श्रीराम के चरण पादुकाओं का आश्रय लेकर अयोध्या जी का राज्य किया
छोटा नागपुर के पास सिमडेगा से 20-25 कि.मी. उत्तर पश्चिम के घने जंगलों में श्रीराम ने अपने बाण से कुछ
वाल्मीकि आश्रम सीता अभ्यारण्य सिहावा से दक्षिण दिशा में सीता नदी को चित्रोत्पला नदी कहते हैं। यहीं वाल्मीकि ऋषि का
टाह डीह तीर्थ से आगे चलकर हम रामपुर भगन से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित सूर्यकुण्ड के दर्शन
क कथा के अनुसार सुतीक्ष्ण आश्रम जाते समय सीता माँ ने यहाँ स्नान किया था। अब यहाँ श्रीराम मंदिर है।
लंका से अयोध्या जी आते समय श्रीराम अपने मित्रोें व सेनापतियों सहित अयोध्या आये थे। सभी लोग श्रीराम के राज्याभिषेक