तुंगभद्रा नदी यहाँ धनुषाकार घुमाव लेती है। नदी के एक ओर बाली-सुग्रीव का युद्ध हुआ था तथा दूसरे किनारे पर वृक्षों की ओट से श्रीराम ने बाली को बाण मारा था। यहां श्रीराम के चरण चिह्न हैं।
सुग्रीव तथा श्रीराम, लक्ष्मण का मिलन हम्पी में ऋष्यमूक पर्वत पर हुआ था। तब सुग्रीव बाली के भय से यहीं रहते थे। यहाँ पहाड़ी में एक कंदरा को सुग्रीव गुफा कहा जाता है।
कन्नड़ में हल्ली का अर्थ है गाँव। यहाँ हनुमानजी तथा श्रीराम का मिलन हुआ था। पास ही एक पर्वत पर हनुमानजी की माँ अंजना देवी का मंदिर है।
पहले यह बहुत बड़ा रहा है। सरोवर के किनारे मंदिरों की कतार है। यहाँ श्रीराम सीतान्वेषण करते हुए आये थे।
रामदुर्ग से 14 कि.मी. उत्तर में गुन्नगा गाँव के पास सुरेबान है। जो शबरी वन का ही अपभ्रंश है। आश्रम के आस-पास बेरी वन है। बेर अब भी मीठे होते हैं। यहाँ शबरी माँ की पूजा वन शंकरी, आदि शक्ति तथा शाकम्भरी देवी के रूप में की जाती है। यहीं श्रीराम व शबरी माँ की …




