यहाँ नदी के किनारे-किनारे यात्रा करते हुए गुल्लू के निकट श्रीराम ने महानदी पार की थी। कभी महानदी गुल्लू से सट कर बहती थी। तभी नदी का पानी मंदिर की बावड़ी में आता था। स्मृति के रूप में बहुत प्राचीन मंदिर तथा बावड़ी आज भी यहां देखी जा सकती है।
प्राचीन ग्रंथों में वर्णित शोणितपुर, श्रीपुर, शिवपुर नामों की यात्रा करता हुआ अब सिरपुर के नाम से प्रसिद्ध हैं। यहाँ आठवीं सदी में बने पुरानी ईंटों के राम दिवाला तथा लक्ष्मण दिवाला हैं। श्रीराम वनवास काल में यहाँ आये थे।
महर्षि वाल्मीकि के अनेक आश्रम मिले हैं। यह आश्रम महासमुन्द जिले में तुरतुरिया नामक स्थान के पास है।
माँ शबरी शबर जाति की थी। यहाँ माँ शबरी का जन्म स्थान है। शबर परिवार नारायण भक्त था। श्रीराम इन्हीं संतों से मिलने आये थे
शिबरी नारायण से 4 कि.मी. दूर खरोद गाँव में भगवान शिव के इस प्राचीन मंदिर की स्थापना लक्ष्मणजी ने की थी।




