वाल्मीकि रामायण में अश्वमुनि के आश्रम का वर्णन ऋषियों के लिए सुरक्षित स्थल के रूप में आया है। शरभंग आश्रम के पास अश्वमुखी देवी का मंदिर है। यह भी मान्यता है कि यह देवी बहुत वीरांगना थीं तथा उन्होंने राक्षसों का संहार किया था। शोध तथा स्थल के क्रम के अनुसार अश्वमुनी का आश्रम यही …
शरभंग आश्रम में श्रीराम को देवराज इन्द्र के दर्शन हुए थे। यहीं श्रीराम का आतिथ्य कर शरभंग मुनि ने योगाग्नि में स्वयं को भस्म किया था। चितहरा स्टेशन से 13 कि.मी. दूर घनघोर जंगल में यह विशाल आश्रम है। यहाँ राम-लक्ष्मण कुण्ड, श्रीराम बाण से बना गर्म ंजल का स्रोत, अश्वमुखी देवी का मंदिर, सूर्य …
मारकुण्डी स्टेशन से एक कि.मी. दूर मार्कण्डेय आश्रम है। मारकुंडी मारकण्डेय का अपभ्रश है। यहाँ भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है। माना जाता है कि पुष्करणी में स्नान के बाद श्रीराम ने यहाँ शिव पूजा की थी। वा.रा. 2/116/1 से 26, मानस 2/285/4 मारकण्डेय आश्रम से अश्वमुनि/ शरभंग आश्रमः- मारकुण्डी-मझगवां- परेवा-चितहरा-नौगवां-शरभंग आश्रम- अश्वमुनि। एम.पी.एस.एच.-11 से …
श्रीराम, लक्ष्मण का विराध से लम्बा संघर्ष चला था और विराध वध में दोनों के हथियार तथा वस्त्र भी खून से सन गए थे। टिकरिया तथा मारकुंडी के बीच एक विशाल पुष्करणी में उन्होंने अपने हथियार तथा वस्त्र धोये थे। वा.रा. 3/4/5 से 12 परिस्थितिजन्य। पुष्करिणी से मारकण्डेय आश्रमः- टिकरिया-जमुनिहाई-मारकण्डेय आश्रम। 12 कि.मी
अमरावती से 3 कि.मी. दूर घनघोर जंगल में एक भयंकर कुण्ड है। इस कुण्ड में झांकने पर भी डर लगता है। यहाँ विराध दफनाया गया था। वा.रा. 3/2, 3, 4 पूरे अध्याय, मानस 3/6/3, 4




