हमारे पूर्वजों ने श्रीराम यात्रा की स्मृति में उनके चरण चिह्नों को सहेज कर रखा है। युगों-युगों के बाद भी ये चरण चिह्न हमें श्रीराम का आदर्श तथा उनके यहां पधारने की कथा की पुष्टि करते हैं।
छोटा नागपुर के पास सिमडेगा से 20-25 कि.मी. उत्तर पश्चिम के घने जंगलों में श्रीराम ने अपने बाण से कुछ रेखाएँ खींची थी। यहां श्रीराम मंदिर तथा सीता रसोई भी है। यह गुमला जिले में है।
श्रीराम जहां भी रात्रि विश्राम करते थे वहां शिव पूजन अवश्य होता था। बगीचा से रामरेखा धाम जाते समय श्रीराम ने यहां भी शिवलिंग की स्थापना की थी। आज भी यहां 10 वीं 11 वीं शताब्दी के मंदिर के अवशेष मिलते हैं।
कुनकुरी से 18 कि.मी. दूर रिंगार घाट गाँव के पास, बगीचा-जसपुर मार्ग के निकट लक्ष्मण जी ने वराह रूप में विचर रहे राक्षस का संहार किया था। यहां लक्षमण जी के पांवों के निशान पत्थर पर बने हैं जिनकी पूजा की जाती है । श्री रामचरित मानस के अनुसार श्रीसीता राम जी सुतीक्षण मुनि आश्रम …




