श्रृंगवेरपुर में गंगा नदी पार करते समय सीता माँ गंगा पार से एक मुट्ठी रेती लायीं थीं। उस रेती की कूरी कर उन्होंने भगवान शिव की पूजा की थीं। बाद में यहाँ शिव मन्दिर की स्थापना हुई। ग्रंथ उल्लेख वा.रा. 2/52/92, 93, मानस 2/101/1 से 2/103/1 2/104 दोहा ।
हाँ केवट ने श्रीराम के चरण धोये थे उसके पश्चात शृंगवेरपुर से 2 कि.मी. दूर गंगाजी के किनारे सीता कुण्ड है। यहाँ से उन्होंने गंगा जी पार की थी तथा सुमंत्र को वापस अयोध्याजी भेजा था।वा.रा. 2/52/74 से 77, मानस 2/99/2 से 2/101 दोहे तकसीता कुण्ड से शिव मंदिर कुरईः- गाड़ी का मार्ग इलाहाबाद घूमकर …
रामसैया सिंगरोर श्रीसीता राम ने यहाँ एक रात्रि विश्राम किया था। निशाद राज गुह ने यहाँ घास की शैया तैयार की थी। यहाँ आज भी उसकी स्मृति में शैया तथा इंगुदी का पेड है। पास ही वीरासन है, जहाँ रात्रि को लक्ष्मण जी ने वीरासन पर बैठ कर रात को पहरा दिया था। ग्रंथ उल्लेख …
श्रृंगवेरपुर सिंगरोर-(गंगाजी) कभी निशादराज गुह की राजधानी थी। इसका वर्तमान नाम सिंगरोर है तथा इलाहाबाद से लगभग 20 कि.मी. उत्तर दिशा में गंगाजी के किनारे है। यहीं केवट प्रसंग हुआ था। निकटवर्ती स्थानों पर संध्या घाट, रामशैया, वीरासन, श्रीराम चरण पादुका, भरत डेरा, जटा वृक्ष आदि अनेक स्थल श्रीराम वनवास से जुडे़ हैं । ग्रंथ …
श्रीराम मंदिर राम कलेवातारा नदी का वर्तमान नाम बकुलाही है। नदी में कंकड़ रेती बहुत होती थी इसलिए नाम बालुकिनी था। प्रतापगढ़ से दक्षिण में लगभग 15-20 कि.मी. दूर यह स्थल मिलता है। स्थान का नाम राम कलेवातारा है। वा.रा. 2/125/26 बालुकिनी नदी से श्रंगवेर पुरः- बेधन गोपालपुर-बालुकापुरा – आनापुर सागर – आनापुर – भगवानपुर …



