भारतवर्ष में श्रीराम / ShriRam in Bharatvarsh

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नासिक में पंचवटी से 8-10 कि.मी. दूर गोदावरी तथा कपिला नदी के संगम पर श्री लक्ष्मण जी ने शूर्पणखां की
श्रीराम ने वर्षा के चार महीने प्रस्रवण चोटी पर बिताये थे तथा वहीं से सीताजी का पता पाकर लंका के
रावण वध के कारण श्रीराम व सीता जी पर ब्रह्महत्या का पाप लगा हुआ था। श्रीराम ने सीता जी के
बक्सर में गंगाजी के किनारे रामरेखा घाट अत्यंत प्रसिद्ध स्थल है। माना जाता है कि ताड़का वध के पश्चात् श्रीराम
परेव पड़ाव का अपभ्रंश है। माना जाता है कि श्री राम लक्ष्मण जी तथा विश्वामित्र जी ने यहां पड़ाव डाला
विवाह के पश्चात् चारों दुल्हा, दुल्हिन यहां आमोद-प्रमोद के लिए आये थे। चारों ने यहां जल-क्रीड़ा की थी इसलिए आज
रतनपुर शहर में पहाड़ी पर श्रीराम ने निवास किया था। पहाड़ी पर ऊँचे मंदिर में श्रीराम के पैर के अँगूठे
देवघाट प्रतापगढ़ स्यंदिका का वर्तमान नाम सई है। जहाँ से श्रीराम ने नदी पार की वह स्थान प्रतापगढ़ से 12
कोदण्ड का अर्थ है धनुष। समुद्र में एक प्राचीन मंदिर में श्रीराम, लक्ष्मण, हनुमान, सुग्रीव, जामवंत तथा विभीषण जी के
महर्षि  वाल्मीकि के अनेक आश्रम मिले हैं। यह आश्रम महासमुन्द जिले में तुरतुरिया नामक स्थान के पास है।