भारतवर्ष में श्रीराम / ShriRam in Bharatvarsh

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ऋषियन शब्द ऋषियों का अपभ्रंश है। रामायण काल में यहाँ ऋषि मंडल था। यहाँ पहुँचने के लिए शंकर गढ़, मऊ
अजमतगढ़ के पास पुरानी सरयू के किनारे एक अत्यन्त विशाल तालाब है जिसमें अब भी बड़ी मात्रा में जल रहता
मिथिला में लोक परम्परा के अनुसार विवाह के चैथे दिन वेदी बना कर पुनः विवाह की परम्परा है। आज भी
शिव मंदिर कांकेर भण्डारीपारा में श्रीराम ने रामनाथ महादेव मंदिर की स्थापना की थी। कांकेर में कर्क ऋषि से मिलने
श्रीराम सीतान्वेषण करते हुए मुंबई में समुद्र तट तक आये थे। यहाँ उन्होंने बालू के शिवलिंग की स्थापना की थी
श्रीराम की बारात का तीसरा विश्राम स्थल श्रीराम जानकी मार्ग पर डेरवा गाँव है। चूँकि बारात ने यहाँ डेरा डाला
रक्शा डोंगरी अर्थात् राक्षसों की पहाड़ियाँ। राक्षसों से युद्ध में श्रीराम ने सीताजी तथा लक्ष्मणजी को सुरक्षा की दृष्टि से
तमिल में कल्याण का अर्थ है विवाह। एक कथा के अनुसार मिमिसाइल में यहाँ के ऋषियों ने श्रीराम से माँग
यह चित्रकूट का बहुत ही प्रसिद्ध स्थल है। पास ही यज्ञवेदी मंदिर है। कुछ विद्वानों का मत है कि, यही
लेखा पत्थर रेंगले बगीचा से 10 कि.मी. पूर्व दिशा में श्री सीताराम जी ने रात्रि विश्राम किया था। ऊँची चट्टानों